पंजाब सरकार की सीएम तीर्थ दर्शन यात्रा पर आरोप लगाए गए हैं। मामले में पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार को तलब कर लिया। यात्रा योजना को महज आने वाले चुनाव में राजनीतिक लाभ लेने के उदेश्य से शुरू करने का आरोप लगाते हुए एक याचिका दायर की गई, जिसमें इस योजना को बंद करने की मांग की गई है।
याचिका में दलील दी गई है कि सुप्रीम कोर्ट ने हज यात्रा अगले 10 सालों में बंद करके इस यात्रा का पैसा सामाजिक कार्यों पर लगाने का निर्देश दिया था, लेकिन इसके विपरीत पंजाब में ऐसी ही योजना शुरू की गई, जो वैसे भी देश की धर्मनिर्पेक्ष नीति के उल्ट है। जस्टिस एसएस सारों व जस्टिस गुरमीत राम की डिवीजन बेंच ने सरकार व सांस्कृतिक मामलों के विभाग को नोटिस जारी करके जवाब तलब कर लिया है। सुनवाई 20 मई को होगी।
लुधियाना के कुलदीप सिंह खैहरा ने एडवोकेट एचसी अरोड़ा के माध्यम से दायर याचिका में कहा है कि सीएम तीर्थ यात्रा किसे कराई जाएगी, इसका भी कोई पैमाना तय नहीं है। आरोप लगाया है कि सत्ताधारी दल अपने चहेतों एवं कार्यकर्ताओं को इस योजना के तहत तीर्थ यात्रा करवाकर आने वाले विधानसभा चुनाव में राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है। याचिका में हाईकोर्ट का ध्यान आकर्षित किया गया है कि इस योजना पर 250 करोड़ रुपए खर्छ किए जा रहे हैं, जो पीआईडीबी वहन कर रही है।
दलील दी गई है कि पीआईडीबी विकास कार्यों के लिए पैसा खर्च कर सकती है, इसका पैसा किसी अन्य कार्यों पर खर्च नहीं किया जा सकता। याचिका में कहा गया है कि करदाताओं का पैसा राजनीतिक लाभ उठाने में खर्च किया जा रहा है। राज्य सरकार पर वित्तीय संकट होने की बात कहते हुए याचिका में कहा गया है कि सरकार के पास कर्मचारियों के वेतन व पेंशनर्स को पेंशन देने के लिए पैसे नहीं है, उधर सरकारी खजाने का दुरूपयोग हो रहा है। याचिका में मांग की गई है कि सीएम तीर्थ यात्रा योजना तुरंत बंद की जानी चाहिए।