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हरियाणा में दिवाली पर दो घंटे पटाखे चलाने की छूट, सीएम बोले- व्यापारियों का नुकसान नहीं होने देंगे

Sun, 08 Nov 2020 03:32 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी/अमर उजाला, फतेहाबाद/पानीपत (हरियाणा)
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फतेहाबाद पहुंचे मुख्यमंत्री मनोहर लाल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा है कि दीवाली पर दो घंटों के लिए लोग पटाखे चला सकेंगे। इसके लिए छूट दे दी गई है। उनके मुताबिक प्रदूषण का स्तर खतरनाक हो गया है और कोरोना भी चल रहा है। प्रदूषण के कारण कोरोना के मरीज फिर से बढ़ने लगे हैं। इन चीजों का ध्यान रखकर पटाखे चलाने पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लेना पड़ा लेकिन फिर भी दिवाली पर पटाखे के लिए दो घंटे की छूट दी गई है। इन दो घंटों के दौरान दिवाली पर लोग पटाखे चला सकेंगे।

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मुख्यमंत्री फतेहाबाद में पूर्व विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया की भतीजी के शादी समारोह में शिरकत करने आए थे। पटाखों पर प्रतिबंध से व्यापारियों को नुकसान के सवाल पर सीएम ने कहा कि दो घंटे के लिए पटाखे बजाने की छूट दे दी है। इस दौरान डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा, विधायक दूड़ाराम, विधायक लक्ष्मण नापा सहित कई नेता मौजूद रहे।

सोनीपत में जहरीली शराब
जहरीली शराब पीने से लोगों की मौत के सवाल पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने रविवार को कहा कि कुछ लोग पैसा कमाने के चक्कर में जहरीली शराब के दुष्प्रभाव का ध्यान नहीं करते हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। कांग्रेस द्वारा इस्तीफा मांगने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि 1980 से लेकर 2004 तक 12 बार जहरीली शराब से मौतें हो चुकी हैं। उस समय जिनकी सरकार थी, उन्होंने इस्तीफे नहीं दिए। 1980 में नरवाना में भी मौत हुई थी। उस समय रणदीप सुरजेवाला तो राजनीति में सक्रिय नहीं थे लेकिन उनके पिता राजनीति में थे। उस समय सुरजेवाला ने क्यों नहीं इस्तीफा दिया।
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डेरा प्रमुख को जेल मैनुअल के अनुसार मां से मिलवाया गया
जेल मैनुअल में लिखा हुआ है कि किसी भी कैदी को सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक जेल अधीक्षक छूट दे सकता है। डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की मां बीमार थी, उनसे मिलने के लिए उन्होंने आवेदन किया था। उसी आधार पर उन्हें मिलवाया गया है। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था का भी पूरा ख्याल रखा गया।

एमबीबीएस करने वालों को बंधन में रखने के लिए भरवाया बांड
मेडिकल फीस बढ़ाने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि फीस नहीं बढ़ाई बल्कि हमने दस लाख रुपये का बांड भरने की शर्त रखी है। जो एमबीबीएस करने के बाद सरकारी नौकरी में नहीं रहेगा, उसे ही दस लाख रुपये भरने पड़ेंगे। जो सरकारी नौकरी में रहेगा, उसकी जिम्मेदारी सरकार की है। एक डॉक्टर बनाने पर डेढ़ करोड़ रुपये तक का खर्च होता है लेकिन यह कुछ समय बाद ही प्राइवेट नौकरी करने लगते हैं। एमबीबीएस करने वालों को बंधन में रखने के लिए यह किया है।

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