हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश की पूर्व सरकार की वित्तीय अनियमितताओं का और ब्योरा श्वेत पत्र के भाग-2 के रूप में शनिवार को जारी किया।
इसी हफ्ते जारी किए गए श्वेत पत्र के भाग-1 में सीएम ने प्रदेश की खंडित अर्थव्यवस्था और खजाना खाली होने के प्रमाण दिए थे। शनिवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु भी मौजूद थे।
श्वेत पत्र के भाग-2 में प्रदेश के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, जिसके अधीन बिजली, सामाजिक कल्याण व सहकारी संस्थान आते हैं, की वित्तीय हालत का ब्योरा पेश करते हुए उनकी कार्यप्रणाली, लाभ और घाटे की जानकारी दी गई। इसके अधीन प्रदेश के सहकारी बैंकों-एचएससीएआरडीबी और हरको बैंक की वित्तीय स्थिति का भी उल्लेख किया गया।
भाग-2 में ही शहरी स्थानीय निकायों के साथ-साथ गैर बजटीय संसाधन प्रबंधन के अंतर्गत विपणन बोर्डों, एचआरडीएफ, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से जारी होने वाले ढांचागत विकास फंड के अनियमित उपयोग और संसाधनों की बरबादी के आंकड़े पेश किए गए।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि बीते दस सालों के दौरान प्रदेश में चलाए गए विकास कार्यों में भी पूर्व सरकार से भेदभाव किया और रोहतक, झज्जर, सोनीपत जिलों को सबसे ज्यादा पैसा देते हुए बाकी जिलों की अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि आंकड़ों से पता चलता है कि कुछ जिलों को तवज्जो दी गई और कुछ की उपेक्षा की गई।
उन्होंने बताया कि हरियाणा ग्रामीण विकास निधि के आंकड़े दर्शाते हैं कि तीन जिले एक तरफ और 18 जिले एक तरफ। इसी प्रकार हुडा में जिन जिलों में संसाधन कम जुटाए गए, उनमें धनराशि अधिक खर्च की गई।
रोहतक, पंचकूला, रेवाड़ी और अंबाला जिलों में इसका विशेष प्रभाव देखने को मिला, जबकि कैथल और फरीदाबाद में संसाधन अधिक और खर्च कम किया गया। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण की ओर से लगभग 3500 करोड़ की राशि आयकर के लिए कुल टर्नओवर से की गई, जबकि लेखा नियमों के अनुसार यह गणना कुल आय पर होनी चाहिए थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में जो भी उचित होगा कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि बीते 10 साल के दौरान प्रदेश में बिजली उत्पादन में 500 फीसदी सी कमी आई है और बिजली उत्पादन व वितरण कंपनियों पर कर्ज को बोझ 200 फीसदी बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि बिजली उत्पादन में घाटा दस वर्षों में 10146 करोड़ पर पहुंच गया है, जबकि बिजली वितरण कंपनियों का घाटा भी 26 गुना बढ़ा है।
एचएसआईडीसी की कार्यप्रणाली का हवाला देते हुए श्वेत पत्र के भाग-2 में कहा गया है कि इसके अधीन 47 संस्थाएं आती हैं, जिनमें प्रदेश की दस चीनी मिलें भी हैं, लेकिन इनमें से शाहबाद चीनी मिल को छोड़ कर सभी मिलें घाटे में चल रही हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि ग्रामीण बैंकों की हालत भी अच्छी नहीं है और उन्हें बचाने के लिए नई सरकार ने 100 करोड़ रुपये जारी किए हैं।