पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से केंद्र सरकार को पंजाब के सिंध जल समझौते की तीन पूर्वी नदियों को नहरों की तर्ज पर पक्का करने (कैनलाइजेशन) के प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के अधीन लाने की अपील की है। इससे जल स्रोतों की संरक्षण और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को मजबूत किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ हुई मीटिंग के दौरान इस संबंध में प्रस्ताव सौंपा, जिसमें मुख्यमंत्री ने 985 किलोमीटर लंबे नदी किनारों पर तीव्र गति आर्थिक कोरिडोर के निर्माण संबंधी सुझाव दिया। इसके अलावा सतलुज, रावी और ब्यास के किनारों की अंदरूनी ढलानों की लाइनिंग, बाढ़ की रोकथाम के प्रबंधों और नदी प्रशिक्षण कामों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे राज्य को अपनी जल शक्ति बढ़ाकर फसलीय विविधता, मानक शहरीकरण और कालोनियों का रचनात्मक ढांचा और राज्य के निवासियों के आर्थिक उत्थान को गति देने के मौके पैदा करने में बड़ी सहायता मिलेगी।
भारत के विभाजन के समय राज्य के जल स्रोतों में हुई कटौती और 1966 में राज्य के पुनर्गठन के समय पैदा हुए विपरीत हालात पर अपने विचार साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सतलुज, रावी और ब्यास नदियों के जरिये राज्य के कृषि अधीन क्षेत्र का केवल 27 फीसदी सिंचित होने के कारण पंजाब का भूजल स्तर काफी नीचे जा चुका है।
उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप राज्य के सात जिले के निकट भविष्य में मरुस्थल का रूप धारण कर सकते हैं, जो अपने आप में इन क्षेत्रों की आर्थिकता को गहरी चोट पहुंचाएगा। कैप्टन ने सतलुज नदी को नहरी तर्ज पर पक्का करने का सुझाव दिया, जिसके लिए तीन से पांच सालों के समय के दौरान 4000 करोड़ रुपये (0.7 बिलियन अमरीकी डॉलर) का निवेश अपेक्षित है और साथ ही कर से छूट, प्राइवेट और सरकारी जमीन का व्यापारिक प्रयोग जैसे वित्तीय उपबंध करने की भी जरूरत है। उन्होंने कहा की इसके लिए अंतर-राष्ट्रीय स्तर के तकनीकी-आर्थिक माहिरों द्वारा इसके व्यवहार्यता सम्बन्धी अध्ययन की शुरुआत से इस काम की शुरुआत की जा सकती है।
कुल 945.24 किलोमीटर है किनारों की लंबाई
कैप्टन ने मॉनसून के दौरान पाकिस्तान की तरफ जाते पानी को रोके जाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा की राज्य की तीन नदियों के किनारे कच्चे हैं, जिनकी लंबाई 945.24 किलोमीटर (सतलुज 484.12 किलोमीटर, रावी 245.28 किलोमीटर और ब्यास 215.84 किलोमीटर) बनती है और यह राज्य के कुल क्षेत्र का करीब 60 फीसदी बनता है।
उन्होंने कहा की राज्य की कुल आबादी के 1/3 फीसदी हिस्से को मॉनसून के दौरान बाढ़ की मार झेलनी पड़ी। उन्होंने कहा की नहरी तर्ज पर नदियों को पक्के करने से पंजाब की आर्थिकता का घेरा बढ़ेगा, आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और राज्य की नौजवान पीढ़ी के लिए रोजगार के मौके बढ़ेंगे।