मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि फिल्म मेसेंजर ऑफ गॉड (एमएसजी) पर मोदी सरकार की सलाह से ही रोक लगाई गई है। केंद्र और राज्य सरकार की खुफिया एजेंसियों ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि इसके रिलीज होने से अमन-कानून व्यवस्था बिगड़ने की संभावना है।
राज्य में शांति बनाए रखने के लिए सरकार वचनबद्ध है, इसलिए केंद्र सरकार से एडवाइजरी मिलने के बाद राज्य सरकार ने फिल्म पर पाबंदी लगाई है। मुख्यमंत्री सोमवार को लंबी हलके में संगत दर्शन कार्यक्रम के दौरान पत्रकारवार्ता कर रहे थे।
सीएम बादल ने कहा कि सरकार राज्य के सभी जिलों में विशाल गोशालाओं का निर्माण कर रही है। इसके लिए जमीन लीज पर ली जा रही है। ईडी अधिकारी की बदली संबंधी विपक्ष के लगाए आरोपों को नकारते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह तबादला केंद्र सरकार की ओर से प्रबंधकीय आधार पर किया गया है।
इस मामले को विपक्ष बेवजह तूल दे रहा है। दिल्ली चुनाव में सीटों की बांट संबंधी पूछे जाने पर बादल ने कहा कि शिअद-भाजपा गठबंधन के लिए यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। सीटों की बांट जल्दी कर ली जाएगी।
एमएसजी के समर्थन में उतरे भाजपा विधायक
एक तरफ मोदी सरकार पर पंजाब में MSG बैन कराने के आरोप लगे हैं, वहीं, एक भाजपा विधायक सरेआम MSG के समर्थन में बयान दे रहे हैं।
हरियाणा के लाडवा के भाजपा विधायक डॉ. पवन सैनी ने कहा कि डेरा सच्चा सौदा प्रमुख की फिल्म मैसेंजर ऑफ गॉड में कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि इस फिल्म के रिलीज होने से समाज को एक नई दिशा मिलने के साथ-साथ युवा वर्ग को नशे जैसी बुराइयों से दूर होने की प्रेरणा भी मिलेगी। डॉ. पवन सैनी जिला परिषद कुरुक्षेत्र के सदस्य नायब सिंह पटाकमाजरा के कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि चाहे स्वच्छता का मामला हो या रक्तदान शिविर लगाने जैसे सामाजिक कार्य, डेरा सच्चा सौदा प्रमुख ने बढ़िया काम करते हुए वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर मिसाल पेश की है। उन्होंने फिल्म एमएसजी का विरोध करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि विरोध से पहले वे इसका कारण लोगों को बताएं। डॉ. सैनी ने कहा कि एमएसजी का विरोध करने की बजाय पीके फिल्म का विरोध करें, जिसमें हमारे देवी-देवताओं का अपमान हुआ है।
डॉ. पवन सैनी ने कहा कि किसी भी फिल्म को रिलीज करना या बंद करना फिल्म सेंसर बोर्ड का काम है, इसमें अन्य किसी को दखल देने का कोई हक नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर इस फिल्म में कुछ भी गलत होता तो फिल्म सेंसर बोर्ड इसे कभी रिलीज करने की इजाजत नहीं देता।
उन्होंने कहा कि आज जो फिल्में आ रही हैं वे सामाजिक नहीं है जिससे युवा वर्ग भटक रहा है। उन्होंने कहा कि मैसेंजर ऑफ गॉड जैसी सामाजिक फिल्मों को बढ़ावा मिलने से हमारे समाज से बुराइयों को खत्म करने में मदद मिलेगी और पूरे परिवार के लोग ऐसी फिल्मों को एक साथ बैठकर देख सकेंगे।