Capt Amarinder Singh (फाइल फोटो)
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पर इस मामले में गांधी परिवार या कांग्रेस को लपेटना गैरवाजिब है। हिंसा के समय राहुल स्कूल में पढ़ते थे और राजीव गांधी पश्चिम बंगाल में थे। सुखबीर संकुचित सियासी हितों के लिए सिखों की भावनाओं से खेल रहे हैं। सीएम ने कहा कि गुनहगारों का कोई धर्म नहीं होता, न वह किसी सियासी पार्टी से जुड़े होते हैं।
अदालत ने सज्जन कुमार को सजा देकर इस केस में मिसाल कायम कर दी है। बाकी दोषियों का भी यही हाल होगा। अगर सुखबीर इस मामले में इतने ही गंभीर हैं तो उन्होंने तुगलक रोड थाने में दर्ज एफआईआर में शामिल 22 आरएसएस-भाजपा वर्करों का मुद्दा क्यों नहीं उठाया। अकालियों द्वारा इस मामले में हो-हल्ला करना राजनीति से प्रेरित है।
कैप्टन ने कहा कि वह लगातार कहते रहे हैं कि दंगों के बाद वह शरणार्थी कैंपों में गए तो लोगों ने सज्जन कुमार का नाम लिया था। पर सुखबीर जिन लोगों का नाम ले रहे हैं, उनका कभी जिक्र नहीं हुआ। दोषियों को सजा देना अदालत पर निर्भर है, इसमें सुखबीर या अकाली दल की कोई भूमिका नहीं है।