इसके आधार पर करतारपुर साहिब कॉरिडोर के लिए चार विभिन्न विकल्पों का प्रस्ताव दिया गया। इन विकल्पों में से सबसे उचित एक विकल्प पर आपसी सहमति हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह एक व्यापक द्विपक्षीय मुद्दा था, इसलिए भारत सरकार के गृह मामलों के मंत्रालय अधीन आगामी मीटिंग का प्रस्ताव पेश किया गया। उन्होंने इस नाजुक मुद्दे पर खेलने के लिए हरसिमरत कौर और अन्य अकाली नेताओं की तीखी आलोचना की।
केंद्र की अनुमति और फंड से हो सकती है भूमि अधिग्रहीत
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जमीन हासिल करने का कोई भी कदम केवल केंद्र सरकार द्वारा मंजूरी और जमीन के जरूरी टुकड़े को हासिल करने के लिए फंड प्राप्ति के बाद ही उठाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय को 1 जनवरी, 2019 को भी एक स्मरण पत्र भेजा गया था। जिसमें इस प्रोजेक्ट जल्द से जल्द शुरू करने के लिए कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।