पंजाब विश्वविद्यालय के सीनेट चुनाव के स्थगित होने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। स्थिति यह है कि आधे शिक्षक एक तरफ तो आधे दूसरी तरफ हो गए हैं। कुछ का कहना है कि चुनाव होने चाहिए तो कुछ का कहना है कि कोरोना के बीच चुनाव का औचित्य समझ नहीं आता। वहीं, इस मामले पर सीनेटरों की भी राय अलग-अलग है।
जानकारों का कहना है कि 31 अक्तूबर तक सीनेट के चुनाव नहीं हो पाएंगे और स्वत: ही सीनेट का दखल खत्म हो जाएगा। ऐसे में पीयू के कार्यों के संचालन में दिक्कत होगी। बता दें कि पीयू सीनेट के चुनाव 24 अगस्त से लेकर अक्तूबर माह तक कई चरणों में होने थे। इसकी तैयारियां पीयू प्रशासन भी कर रहा था।
वहीं दूसरी ओर चुनाव में खड़े होने वाले उम्मीदवारों ने अपना प्रचार-प्रसार शुरू कर दिया। 27 लोगों ने नामांकन भी करवाए दिए थे। इसी बीच आपदा अधिनियम को ध्यान में रखते हुए चंडीगढ़ प्रशासन ने पीयू को अवगत कराया। चुनाव में भीड़ एकत्रित होगी और इससे कोरोना आदि का खतरा होगा। इसी को लेकर चुनाव पीयू को स्थगित करना पड़ा लेकिन शिक्षकों की राय अलग-अलग सामने आई।
क्या कहते हैं शिक्षक
कोरोना लगातार बढ़ रहा है। सबसे पहले लोगों की जान बचाना जरूरी है। लोग खुद ही घरों से बाहर नहीं आ रहे हैं। हर कोई अपनी सुरक्षा कर रहा है। ऐसे में सीनेट का चुनाव कैसे हो सकता है। वोटरों की जान को खतरे में नहीं डाला जा सकता। सीनेट के चुनाव स्थगित करने का निर्णय सही है।
- प्रो. एमसी सिद्धू, बॉटनी विभाग, पीयू
31 अक्तूबर तक सीनेट बन जानी चाहिए
सीनेट के चुनाव स्थगित करना सही नहीं है लेकिन स्थगित हो गए तो 31 अक्तूबर से पहले चुनाव कराकर नई सीनेट बनानी चाहिए। यदि सीनेट नहीं बन पाती है तो शिक्षकों को मंच नहीं मिलेगा, वह अपनी बात कहां रखेंगे, इसके लिए पुटा के चुनाव करवाए जाएं।
- प्रो. मोहम्मद खालिद, ईवनिंग स्टडीज, पीयू
नहीं टलने चाहिए थे चुनाव
सीनेट चुनाव के लिए सभी तैयारियां हो गईं थीं। 27 सदस्यों ने नामांकन करवा दिए थे। प्रचार-प्रसार भी चल रहा था। ऐसे में चुनाव करवाए जा सकते थे। सीनेट का चुनाव होना बहुत जरूरी है। पीयू के कामों का संचालन इसके जरिए ही होता है।
- डॉ. प्रवीन गोयल, इंजीनियरिंग विभाग, पीयू
चुनाव के चक्कर में किसी की जान से नहीं खेल सकते
कोरोना से हर कोई सुरक्षित रहना चाहता है। लोग घरों से निकलने से बच रहे हैं। हर किसी को अपनी जान की चिंता है। ऐसे में सीनेट चुनाव करवाना ठीक नहीं है। चुनाव स्थगित किया गया, यह निर्णय स्वागत योग्य है।
- डॉ. जेएस सहरावत, एंथ्रोपोलॉजी विभाग, पीयू
कराए जा सकते थे चुनाव
सीनेट चुनाव के लिए सभी तैयारियां हो गईं थीं। उम्मीदवारों ने नामांकन करवा दिए थे और प्रचार-प्रसार भी तेजी से चल रहा था। इस कार्य में सभी का परिश्रम लगा हुआ था जो चुनाव टलने से प्रभावित हुआ। पीयू चाहती तो चुनाव करवा सकती थी।
- प्रो. रोनकी राम, सीनेटर, पीयू
लोगों की जान से बढ़कर कुछ नहीं
कोरोना के काल में सबसे जरूरी है लोगों की जान बचाना। जान से बढ़कर सीनेट चुनाव नहीं है। लोग घरों से नहीं निकल पा रहे हैं तो ऐसे में वह वोट कैसे देने आएंगे। चुनाव का औचित्य तभी है जब लोग फ्री और फेयर हों।
- डॉ. अजय रंगा, यूआईएलएस विभाग, पीयू