मंडी में किसान की फसल बचाने की जिम्मेदारी आढ़ती की
बदलते मौसम और बारिश से किसानों की फसलों को बचाने की जिम्मेदारी आढ़तियों की होती है। इसके लिए उनको तिरपाल समेत पॉलिथीन की व्यवस्था करनी होती है लेकिन आढ़ती इसको लेकर खानापूर्ति करते हैं। नियमों के तहत अगर कोई ऐसा नहीं करता है तो उस आढ़ती का लाइसेंस सस्पेंड करने का नियम है। हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के नियमों में साफ लिखा है कि इन नियमों का पालन कराने के लिए मार्केट कमेटी सचिव जिम्मेदार होंगे।
72 घंटे में भुगतान के दावे, इस बार नहीं एसएमएस सिस्टम
हरियाणा सरकार का दावा है कि मंडियों से 24 घंटों में उठान किया जाएगा और जे फार्म कटने के 72 घंटों के बाद किसानों को सीधे खाते में भुगतान किया जाएगा। इस बार एमएमएस सिस्टम लागू नहीं रहेगा। जिस भी किसान का मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण है, वह मंडी में फसल लेकर आ सकता है। इससे पहले कमेटी किसान को फसल लाने का मैसेज भेजती थी, इसका किसानों ने विरोध किया था।
288 किसान मंडियों में लेकर पहुंचे गेहूं, खरीदा एक दाना भी नहीं
हरियाणा में दूसरे दिन भी गेहूं की खरीद नहीं हो पाई। हालांकि, 14 जिलों में 288 किसान 1396 मीट्रिक टन गेहूं लेकर मंडियों में पहुंचे। अभी तक केवल पानीपत में दो किसानों का 19 टन गेहूं खरीदा गया है। शेष किसानों का गेहूं मंडियों में पड़ा है। बारिश के चलते कम संख्या में किसान पहुंच रहे हैं। मंडी अधिकारियों का कहना है कि अभी सीजन में तेजी आने में कम से कम एक सप्ताह तक लग सकता है।
मंडियों में गेहूं तो आने लगा है लेकिन न तो बारदाना है और न ही अभी तक खरीद एजेंसियों के कर्मचारी मंडियों में आए हैं। नियमों के तहत खरीद से पहले मंडियों में बारदाना पहुंचाया जाता है लेकिन अभी तक सरकार की तरफ से मंडियों में कोई बारदाना नहीं भेजा गया है। जब तक बारदाना नहीं आएगा तो खरीद कैसे होगी। हमने अधिकारियों के सामने यह समस्या रखी है। -रजनीश चौधरी, चेयरमैन, आढ़ती एसोसिएशन हरियाणा।
सरकार ने बारदाने की पुख्ता व्यवस्था की है। तीन लाख बेल्स बारदाना खरीदा गया है और मंडियों में भेजा जा रहा है। बारिश के चलते जरूर कुछ असर पड़ा है, किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आने दी जाएगी। सभी एजेंसियों को आदेश जारी किया गया है। - दुष्यंत चौटाला, डिप्टी सीएम।