फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जीएमएसएच16: जननी सुरक्षा योजना में मुफ्त सुविधा का दावा, पर जांच करने तक की व्यवस्था नहीं

Mon, 17 Feb 2020 02:10 PM IST
खुशबू गोयल वीणा तिवारी, चंडीगढ़
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
विज्ञापन
जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) में गर्भावस्था के दौरान मुफ्त जांच और इलाज का दावा करने वाले सेक्टर 16 स्थित गवर्नमेंट मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (जीएमएसएच) में थायरायड और कॉग्लोग्राम जैसी महत्वपूर्ण जांच हफ्तों से बंद है।
विज्ञापन


चौंकाने वाली बात यह है कि महज किट की आपूर्ति समय से सुनिश्चित न होने से यह परेशानी हो रही है। इस बाबत अस्पताल प्रशासन का कहना है कि दो से चार दिन में जांच शुरू हो जाएगी, जबकि योजना में गर्भवती महिलाओं को गर्भधारण करने से प्रसव के बाद तक चिकित्सा सुविधाएं निशुल्क दी जानी हैं। गाइनी विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि जननी सुरक्षा योजना में महज दावे किये जा रहे हैं।

कभी थायरायड बंद हो जाता है तो कभी कॉग्लोग्राम। कई बार तो महीनों तक फोलिक एसिड की आपूर्ति ठप रहती है। इस संबंध में बार-बार कहने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती। गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को निजी सेंटरों पर महंगे शुल्क अदा कर जांच करानी पड़ती है।
विज्ञापन


गर्भावस्था के दौरान ये जांच जरूरी
सीबीसी, एचबी, कॉग्लोग्राम, एचबीएसएजी, टीएसएच, आरबीएस, एससीवी, जीडीएम, एबीओआरएच, यूरिन और शुगर एल्बुमीन।

समय पर किट खत्म होने की जानकारी न मिलने से इस तरह की परेशानी हुई है। किट की सप्लाई दो से तीन दिन में हो जाएगी।
- डॉ. वीके नागपाल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जीएमएसएच-16 चंडीगढ़
विज्ञापन

केस- 1: सेक्टर-16 स्थित जीएमएसएच की गाइनी ओपीडी में शुक्रवार को कई गर्भवती महिलाएं थायरायड टेस्ट के  लिए घंटे भर से इंतजार कर रही थीं। एक स्टाफ ने आकर बताया कि जांच अस्पताल में नहीं हो पाएगी। इसका कारण, थायरायड जांच की किट का खत्म होना है। यह सुनकर उन महिलाओं ने अपना-अपना पर्चा उठाया और जांच कराने के  लिए निजी पैथालॉजी सेंटर चली गईं।

केस- 2: जीएमएसएच की गाइनी ओपीडी में शनिवार की दोपहर जांच कराने आई गर्भवती महिलाओं को कॉग्नोग्राम जांच बंद होने की सूचना दी गई। कुछ महिलाओं ने इस टेस्ट पर आने वाला खर्च पूछा, जवाब मिला दो से ढाई हजार रुपये। यह सुनकर कुछ तो वापस चली गईं, लेकिन कुछ डॉक्टर के पास जाकर इस टेस्ट को न कराने पर होने वाले नुकसान के बारे में पूछताछ करती दिखीं। इस संबंध में जब उनसे पूछा गया तो उनका कहना था कि इतनी महंगी जांच कराने केलिए पैसे नहीं हैं। अगर सरकारी में होता तो करा लेते अब निजी सेंटर में दो से ढाई हजार कहां से खर्च करेंगे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें