चंडीगढ़। कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) के तहत इलाज करवाने के बाद बीमा की राशि का भुगतान नहीं करना चंडीगढ़ प्रशासन के स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग के निदेशक, बीमा कंपनी और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के सीनियर स्टेट मेडिकल कमिश्नर को महंगा पड़ गया। सुनवाई के बाद उपभोक्ता फोरम ने सभी को सेवा में कोताही का दोषी पाया और क्लेम की राशि का भुगतान करने के साथ हर्जाना देने का भी आदेश दिया है।
सेक्टर-43ए में रहने वाली निधि ढींगरा ने उपभोक्ता फोरम में चंडीगढ़ प्रशासन के स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग के निदेशक, सेक्टर-19 स्थित ईएसआईसी के रीजनल ऑफिस में तैनात सीनियर स्टेट मेडिकल कमिश्नर, कर्मचारी राज्य बीमा निगम के रीजनल डायरेक्टर और सेक्टर-23 स्थित ईएसआई डिस्पेंसरी के मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज के खिलाफ शिकायत दी। अपनी शिकायत में शिकायतकर्ता ने कहा कि उनके पूरे परिवार का ईएसआईसी से इंश्योरेंस कराया गया है।
इस दौरान उनके पति रविंद्र ढींगरा का सेक्टर-23 के ईएसआईसी डिस्पेंसरी में प्रारंभिक इलाज किया गया। इसके बाद उन्हें सेक्टर-29 के ईएसआईसी हॉस्पिटल में रेफर किया गया। वहां से चेकअप के बाद ट्रीटमेंट के लिए पीजीआई भेज दिया गया। शिकायतकर्ता ने बताया कि उनके पति त्वचा की बीमारी से जूझ रहे थे और डॉक्टरों ने उन्हें पीजीआई में सर्जरी की सलाह दी गई लेकिन पीजीआई में लंबी वेटिंग लिस्ट होने की वजह से उन्होंने वर्ष नवंबर 2018 में मोहाली के आईवीवाई हॉस्पिटल में इलाज करवाया। सर्जरी के बाद शिकायतकर्ता ने सेक्टर-23 के ईएसआईसी डिस्पेंसरी के मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज के पास 80,173 रुपये के मेडिकल क्लेम के लिए आवेदन किया लेकिन उसे खारिज कर दिया गया। यह कहा गया कि क्लेम फाइल करने का समय बीत चुका है।
विभाग ने कहा- हमने नहीं खारिज किया दावा, सिर्फ दस्तावेज मांगे
उपभोक्ता फोरम की तरफ से सभी पार्टियों को नोटिस भेजा गया। चंडीगढ़ प्रशासन के स्वास्थ्य व परिवार कल्याण के निदेशक और ईएसआईसी के रीजनल ऑफिस के सीनियर स्टेट मेडिकल कमिश्नर की तरफ से जवाब दाखिल किया गया। उन्होंने कहा कि उनकी तरफ से शिकायतकर्ता के दावे को खारिज नहीं किया है। उन्होंने सिर्फ यह कहा है कि वह सभी औपचारिकताएं पूरी करें और उसके बाद दावे को प्रस्तुत करें। इसके अलावा उन्होंने कहा कि दावे के साथ जो कैशमेमो प्रस्तुत किए गए थे, वह एक साल से ज्यादा पुराने थे। शिकायतकर्ता ने असली बिल भी जमा नहीं कराये थे।
अन्य कारणों का हवाला देकर विरोधी पार्टियों ने शिकायत को रद्द करने की मांग की। हालांकि फोरम में सभी पक्षों को सुनने के बाद सभी को सेवा में कोताही का दोषी पाया। फोरम ने शिकायतकर्ता के पति के इलाज में खर्च हुए 80,173 रुपये वापस करने के आदेश दिए। साथ ही शारीरिक व मानसिक पीड़ा झेलने के लिए 7000 रुपये मुआवजा व मुकदमे के खर्च के रूप में 5000 रुपये देने के आदेश दिए। फोरम ने लिखा कि यह आदेश चारों पक्षों को पर लागू होंगे और 30 दिन के अंदर इनकी पालना करनी होगी। अगर वह ऐसा करने में असफल रहते हैं तो उन्हें अतिरिक्त 15000 रुपये देने होंगे।