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Chandigarh News: सीआईसीयू ने पीएसईआरसी में उठाए औद्योगिक टैरिफ और सिस्टम खामियों के सवाल

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संवाद न्यूज एजेंसी
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लुधियाना। पंजाब के औद्योगिक क्षेत्र की ओर से चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल अंडरटेकिंग्स (सीआईसीयू) ने पीएसईआरसी के समक्ष मजबूती से उद्योग का पक्ष रखा। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए एग्रीगेट रेवेन्यू रिक्वायरमेंट (एआरआर) और टैरिफ निर्धारण पर हुई सार्वजनिक सुनवाई में सीआईसीयू अध्यक्ष उपकार आहूजा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने आयोग को विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
आहूजा ने कहा कि लुधियाना का औद्योगिक आधार टेक्सटाइल, ऑटो कंपोनेंट्स, साइकिल, स्पोर्ट्स गुड्स, फाउंड्री और इंजीनियरिंग सेक्टर पर आधारित है। बढ़ती बिजली लागत और अनियमित आपूर्ति रोजगार, निर्यात और राज्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। चैंबर ने आग्रह किया कि वित्त वर्ष 2024-25 के ट्रू-अप केवल ऑडिटेड खातों और सत्यापित आंकड़ों के आधार पर हो और बिजली कंपनियों की अक्षमताओं का बोझ उपभोक्ताओं पर न डाला जाए।
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पावर कॉस्ट और सिस्टम खामियां
सीआईसीयू ने पावर परचेज कॉस्ट, कमजोर डिमांड फोरकास्टिंग, शॉर्ट-टर्म मार्केट से महंगी खरीद और डीएसएम पेनल्टी जैसी अनियमितताओं पर सवाल उठाए। लुधियाना के औद्योगिक इलाकों में बार-बार बिजली कट, फीडर ट्रिपिंग, वोल्टेज फ्लक्चुएशन, गलत बिलिंग और मल्टीप्लाइंग फैक्टर की त्रुटियों से करोड़ों की रेट्रोस्पेक्टिव मांग जैसे मुद्दे भी सामने आए।
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व्यावहारिक सुझाव और समाधान
चैंबर ने 160 करोड़ रुपये की पावर इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडर्नाइजेशन योजना को तेज़ी से लागू करने, क्लीन पोल पॉलिसी अपनाने, पीक्यू मीटर पेनल्टी पर मोरेटोरियम, पांच साल के फिक्स्ड इंडस्ट्रियल टैरिफ और तकनीकी पदों पर त्वरित भर्ती की सिफारिश की। इसके अलावा, रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने और महंगी स्पॉट मार्केट निर्भरता कम करने का सुझाव दिया। उपकार आहूजा ने कहा कि प्रतिस्पर्धी औद्योगिक टैरिफ कोई रियायत नहीं, बल्कि पंजाब के आर्थिक भविष्य में निवेश है। इस सुनवाई के माध्यम से सीआईसीयू ने लुधियाना उद्योग की सबसे सशक्त और विश्वसनीय आवाज के रूप में अपनी भूमिका को दोहराया।
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