सुंदरलाल बहुगुणा की फाइल फोटो।
- फोटो : सोशल मीडिया
चिपको आंदोलन के नेता और पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा का अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में कोरोना संक्रमण के चलते निधन हो गया। युवसत्ता के फाउंडर प्रमोद ने बताया कि शहर के पेड़ों को डिजाइन के नाम पर बनाई गई लोहे की ग्रिलों से आजादी दिलाने में बहुगुणा का बहुत बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने युवसत्ता के साथ मिलकर शहर के लगभग 300 से 400 वर्ष पुराने 30 पेड़ों को हेरिटेज का दर्जा दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
प्रमोद ने बताया कि चंडीगढ़ सेक्टर-17 में सौंदर्यीकरण के नाम पर पेड़ों को लोहे की ग्रिल में कैद कर दिया गया था। मैंने उन्हें इस बात की जानकारी दी तो उन्होंने फौरन मौके पर ले जाने के लिए कहा। उन्होंने इसका दुष्प्रभाव बताते हुए इसका विरोध जताया। अगले ही दिन यह मुद्दा अखबारों की सुर्खियां बना और आखिरकार प्रशासन को लोहे की ग्रिल हटानी पड़ी।
इसी तरह जब युवसत्ता ने पेड़ों को हेरिटेज का दर्जा दिलवाने का काम शुरू किया, उस समय चंडीगढ़ प्रशासन ने पहले 10 और फिर 12-15 पेड़ों को ही हेरिटेज श्रेणी में डाला। जानकारी मिलते ही बहुगुणा चंडीगढ़ आए और 30 पेड़ों को हेरिटेज का दर्जा दिलवाया। प्रमोद ने बताया, मेरा परिचय उनके साथ 80 के दशक में मेरे गुरु ओंकार चंद के जरिए हुआ। आचार्य विनोबा भावे के भूदान आंदोलन में ओंकार चंद और बहुगुणा एक साथ काम करते थे। इसके बाद वे और उनकी पत्नी वार्षिक ग्लोबल यूथ पीस फेस्ट में स्कूलों और कॉलेजों में पर्यावरण संरक्षण जागरूकता के लिए कई बार आए।