फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चिल्ड्रन थियेटर फेस्टिवल के अंतिम दिन 4 नाटक

Tue, 09 Sep 2014 03:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
शहर के सरकारी स्कूलों के छात्रों का चिल्ड्रन थियेटर फेस्टिवल सोमवार को चार रोचक कहानी के साथ समाप्त हुआ।
विज्ञापन


प्लाजा सेक्टर-17 में शाम पांच बजे प्रस्तुत किए चार नाटकों में बच्चों के दर्द और उनकी अनसुनी बातों को बयां किया गया, तो कुछ नाटक ने समाज में महिलाओं के प्रति हो रहे अत्याचार छेड़छाड़ के मामले और शिक्षा व्यवस्था पर कटाक्ष किया। चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी सेक्टर-34 की ओर से यह फेस्टिवल पेश किया गया।

फेस्टिवल के आखिरी दिन ‘ज्ञान है तो जहान’, ‘ये मेरा इंडिया’, आइना बच्चों का और ओल्ड करेक्टर नई कहानी नाटक पेश किए गए।

‘ये मेरा इंडिया’ में किया एजुकेशन सिस्टम पर कटाक्ष
निर्देशक करण गुलजार के निर्देशन में सरकारी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-15 के 30 छात्रों ने ‘ये मेरा इंडिया’ नाटक पेश किया गया। इसमें बच्चों ने समाज में महिलाओं के प्रति हो रहे अत्याचार, छेड़छाड़ के मामले, तेजाब फेंकने के हादसे और एजूकेशन सिस्टम पर कटाक्ष किया। साथ ही नाटक की कहानी में प्राइवेट स्कूल को एक दुकान मात्र दिखाया गया, जहां पैसे देने पर डिग्री मिल जाती हैं। सरकारी स्कूलों के छात्रों की हालत भी दिखाई, जिनमें न शिक्षक और न ही अभिभावक कदर करते हैं।
विज्ञापन


ज्ञान है तो जहान नाटक में ज्ञान का महत्व दिखाया
निदेशक अभिमन्यु के निर्देशन में सरकारी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-22 के 32 छात्रों ने ‘ज्ञान है तो जहान’ नाटक का मंचन किया। इसकी कहानी में ज्ञान के महत्व दिखाया गया।

निर्देशक जसवीर ने दिखाया ‘आइना बच्चों का’
निर्देशक जसवीर ने सरकारी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-44 के 30 बच्चों ने ‘आइना बच्चों का’ नाटक दिखाया। इसमें बाल मजदूरी, कन्या भ्रूणहत्या और बच्चों की बातें न सुनने को दिखाया गया। नाटक में बच्चों पर पढ़ाई के बोझ को भी खूबसूरती से पेश किया गया।
विज्ञापन


दर्शकों से सवाल: हर बच्चे में अलग टैलेंट, तो मुकाबला क्यों
विनोद भारती के निर्देशन में ‘ओल्ड करेक्टर नई कहानी’ नाटक को सरकारी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-27 के 27 छात्रों ने पेश किया। इस नाटक की कहानी में कछुआ और खरगोश की दौड़ को नए अंदाज में दिखाया गया। इसमें लोगों की सोच को बदलने का आग्रह किया गया। नाटक में दिखाया गया कि हर बच्चे में नया टैलेंट है और उनके बीच कोई मुकाबले नहीं होने चाहिए। अंत में दर्शकों से कलाकारों ने सवाल किया कि हर बच्चे में अलग टैलेंट है तो मुकाबला क्यों किया जाता है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें