सरकारी स्कूल में बच्चों से मजदूरी कराए जाने का मामला सामने आया है। बच्चे दुकान से स्कूल तक भारी-भरकम लोहे की चौगाठ उठाकर ला रहे थे। मामला पंजाब के कपूरथला का है। पंजाब का श्रम विभाग साल में दो बार बाल मजदूरी रोकने के लिए व्यापक तौर पर दुकानों, ढाबों और रेहड़ियों पर छापामारी करता है। इस टीम का हिस्सा शिक्षा विभाग के अधिकारी भी होते हैं।
लेकिन सरकारी स्कूलों में बच्चों से सरेआम लेबर पर जिला शिक्षा अधिकारी सेकेंडरी के दोहरे मापदंड सामने आ रहे हैं। सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल नडाला में बाल मजदूरी कराए जाने का मामला का सामने आया है। दो दिन पहले स्कूल से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित वेल्डिंग की दुकान से स्कूल के ही पांच-छह बच्चे पैदल एक लोहे की भारी-भरकम चौगाठ उठाकर स्कूल लाए।
डीईओ सेकेंडरी मस्सा सिंह ने भी सफाई देते हुए अजीब बयान दिया, बोले कि बच्चों से तो हम घर भी काम करवाते हैं, बच्चों को स्ट्रांग बनाना चाहिए। वैसे उनके पास कोई शिकायत नहीं आई है। मीडिया से ही पूछने लगे कि किसी बच्चे के चोट तो नहीं लगी ना, फिर तो शुक्र है। वैसे प्रिंसिपल आशा रानी का तबादला हो गया है। अब भी अगर शिकायत आती है तो वह उस पर जरूर कार्रवाई करेंगे। इसके बाद डीईओ ने सफाई देते हुए कहा कि वैसे बच्चो से लेबर नहीं करवाई जा सकती है।