राहत एवं बचाव कार्य जारी
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इसके बाद टनल में लोहे का फ्रेम डालकर ऊपर फिक्स किया गया और फिर से खुदाई शुरू की गई। शाम पांच बजे पुराने बोर का निचला भाग मिलने का दावा किया गया लेकिन फतेहवीर को निकालने की जद्दोजहद जारी रही। शाम 6 बजे भी ऐसे ही हालात दिखाई दिए।
इस दौरान दोनों बोर के आपस में संपर्क होने की स्थिति जानने के लिए टीम के सदस्य पुराने बोर के ऊपरी हिस्से पर कान लगाकर आवाज सुनने की कोशिश करते रहे।
डीसी घनश्याम थौरी ने कहा कि इस जमीन में पहले से कई पुराने बोर हैं और इसी वजह से जिस बोर में फतेहवीर सिंह फंसा है उसे डिटेक्ट करने में दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के दौरान कई रुकावटें आने के चलते देरी हुई है।
मैन्युअली ऑपरेशन पर उन्होंने कहा कि आर्मी, असॉल्ट इंजीनियरिंग रेजीमेंट और एनडीआरएफ से मशविरा करके फैसला किया गया था। प्रशासन, डाक्टर्स की टीम और एंबुलेंस को पिछले तीन दिन से तैयार रखे हुए हैं लेकिन ये तमाम प्रबंध तब तक बेकार हैं, जब तक बच्चे को नहीं निकाला जाता।
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह
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हादसे के चार दिन बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ट्वीट कर कहा कि सभी दल पूरी गंभीरता से ऑपरेशन में जुटे हैं और सब अच्छा होने की प्रार्थना करते हैं। हालांकि इस पर लोगों ने मुख्यमंत्री पर सवाल उठाने वाले कमेंट लिखे हैं।
गुस्साए लोगों ने किया चक्का जाम
गुरुवार को 150 फुट गहरे बोर में गिरे दो साल के फतेहवीर सिंह को निकालने में हो रही देरी को लेकर सोमवार को लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। लोग इस कदर आक्रोशित हो उठे कि घटनास्थल से सीधे बठिंडा मानसा रोड पर आकर चक्का जाम कर दिया। प्रदर्शन में महिलाएं भी मौजूद थीं।
गुस्साए लोग कई घंटों तक कड़ी धूप में सड़क पर ही बैठे रहे और सरकार से मांग की कि फतेहवीर सिंह को तुरंत बाहर निकाला जाए। लोगों ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया है।
इसी कारण बचाव कार्य में देरी हो रही है। इस देरी ने सरकार की मामले के प्रति संवेदनहीनता को बेनकाब किया है। तकनीकी तौर पर उक्त ऑपरेशन बुरी तरह से फेल रहा है।