खरना के साथ छठ का व्रत शुरू हो गया। गुड़-चावल से बनी खीर, गेहूं के आटे से बनी रोटी और उस पर शुद्ध देसी घी को खरना कहा जाता है।
खरना का प्रसाद लेने के लिए दूर-दूर से लोग व्रतियों के घर पहुंचे। खरना के बाद निर्जला व्रत शुरू हो गया। 8 नवंबर की शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। 9 नवंबर की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाएगा।
न्यू लेक पर प्रशासन ने छठ पूजा की सभी तैयारियां पूरी कर लीं। पूर्वांचल वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्यों ने भी न्यू लेक पर श्रमदान दिया।
एसोसिएशन के सदस्यों ने बताया कि सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। जो थोड़ी बहुत कमियां रह गई हैं उन्हें शुक्रवार तक पूरा कर लिया जाएगा।
यह होगी व्यवस्था
1. न्यू लेक पर साढ़े तीन फुट तक पानी भरा गया
2. सभी स्ट्रीट लाइटों को ठीक कर दिया गया
3. टूटी गई टाइलों को बदला दिया गया
4. पीने के पानी के लिए जगह-जगह वाटर टैंक लगाए गए
5. महिला पुलिस बल की भी तैनाती की जाएगी
6. 100 वालंटियर तैनात होंगे, परिचय पत्र भी दिए जाएंगे
7. मैरिज ब्यूरो का स्टाल लगाया जाएगा
8. न्यू लेक पर सात घाट बनाए जाएंगे
9. प्रसाद और चाय की व्यवस्था होगी
10. इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट की खाली जगह पर होगी पार्किंग
अस्थाई घाट भी बनाए
पूर्वांचल वेलफेयर एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष चंद्रमा मिश्रा ने बताया कि छठ पूजा के लिए जगह-जगह अस्थाई तौर पर घाट बनाए गए हैं। हल्लो माजरा, विकासनगर, रामदरबार और ढकौली में अस्थाई तौर पर घाट बनाए गए हैं। इन इलाकों में भी छठ पूजा धूमधाम से मनाई जा रही है। यहां पर पूर्वांचल इलाके के लोग काफी संख्या में रहते हैं।
अतिशबाजी न करने की हिदायत
पूर्वांचल वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान राजेंद्र सिंह, सचिव प्रभुनाथ शाही और छठ पूजा समिति के चेयरमैन रमाकांत राय ने सभी लोगों से आग्रह किया है कि वह न्यू लेक पर आतिशबाजी पर न करें। इससे बेवजह प्रदूषण फैलता है। उन्होंने बताया कि कई बार छठ पूजा पर लोग न्यू लेक पर आतिशबाजी करते हैं।