प्रेम में विदेशी युवती को इस कदर धोखा मिला कि अब वो न अपने वतन की रही और न ही भारत की। दरअसल पढ़ने के लिए भारत आई ईरानी युवती को प्रेम में इस कदर धोखा मिला। जहां उसके बे-वतन होने का खतरा मंडराया वहीं अब तक उसे भारतीय नागरिकता भी नहीं मिली।
ईरान से पढ़ने के लिए 20 साल पहले भारत आई युवती को यहां एक सिख युवक से प्रेम में धोखा मिला। आरोपी प्रेमी चंडीगढ़ का निवासी है। सहर गाराचुरलू नामक युवती अब अपनी लड़ाई कोर्ट में लड़ रही है, क्योंकि अब उस पर बे-वतन होने का भी खतरा मंडरा रहा है।
इस बीच वीरवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस एम. जयपॉल ने भारत की नागरिकता पाने के लिए दायर की गई सहर की याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने साफ किया कि जब तक ईरान सरकार सहर को ईरानी नागरिकता छोड़ने की इजाजत नहीं देती, उसे भारत की नागरिकता नहीं मिल सकती।
इस फैसले के बाद अब सहर के पास भारत में रहने के लिए महज एक वर्ष का वीजा है, जो उसे 24 जून को एक याचिका पर हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए केंद्र सरकार ने वीजा अवधि बढ़ाते हुए जारी किया है। इस अवधि के दौरान यदि ईरान सरकार ने उसके नागरिकता छोड़ने के आवेदन को स्वीकार कर लिया, तो उसे भारत की नागरिकता मिल जाएगी।
ये है युवती के प्रेम, धोखा, संघर्ष और संवैधानिक अड़चन की कहानी
मुस्लिम युवती
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सहर ने साल 2010 में भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए आवेदन किया था। आवेदन की शर्तों के अनुसार उसे पहले ईरान की नागरिकता छोड़नी थी। इसके लिए सहर ने ईरान के दूतावास में आवेदन भी कर दिया था, लेकिन अब तक ईरान सरकार ने इस मामले में कोई भी कार्यवाही नहीं की है।
हाईकोर्ट ने दोहरी नागरिकता की संवैधानिक अड़चनों को जाहिर किया :
सहर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि वह स्वेच्छा से भारत की नागरिकता हासिल करना चाहती है। याचिका में सहर ने कोर्ट से मांग की थी कि वह भारत सरकार को उसे भारत की नागरिकता देने के निर्देश जारी करे। वीरवार को हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि भारतीय संविधान के अनुसार, किसी को भी दोहरी नागरिकता यानी एक साथ दो देशों की नागरिकता, नहीं दी जा सकती। इस बीच, ईरान सरकार ने भी यह जानकारी दे दी है कि उसके पास सहर का आवेदन पहुंच गया है, जिस पर कार्रवाई की जा रही है।
यह है मामला
ईरान की सहर गाराचुरलू वर्ष 1996 में पढ़ाई करने भारत आई थी। वर्ष 2004 में चंडीगढ़ के विक्रम बैंस नामक युवक से उसने सेक्टर-46 के गुरुद्वारे में सिख रीति-रिवाज से विवाह कर लिया। इस बीच ईरान में परिजनों को विवाह की जानकारी देने के लिए वर्ष 2005 में उसने मुस्लिम कानून के तहत भी विक्रम बैंस से विवाह का करारनामा बना लिया, लेकिन इसके बाद सहर को पता चला कि विक्रम पहले से शादीशुदा है।
इसी दौरान विक्रम ने सहर से फर्जी तरीके से तलाकनामे पर हस्ताक्षर करवा लिए। इस पूरे मामले को सहर ने चंडीगढ़ की जिला अदालत में चुनौती दी हुई है। सहर को विवाह के आधार पर वर्ष 2006 में भारत सरकार ने 15 वर्ष की अवधि का पीआईओ कार्ड यानी पर्सन ऑफ इंडियन ओरिजिन कार्ड जारी कर दिया गया था, जिससे उसके वीजा को नियमित तौर एक्सटेंशन मिलती चली गई।