चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) ने पिछले कई सालों से एक ही कुर्सी पर कब्जा जमाए बैठे अपने 45 कर्मचारियों का विभाग बदल दिया है। ट्रांसफर किए गए कर्मचारियों में 32 सीनियर असिस्टेंट व क्लर्क, 9 जूनियर स्केल स्टेनोग्राफर व स्टेनो टाइपिस्ट और 4 सुपरिंटेंडेंट शामिल हैं। सीएचबी की तरफ से तबादले के आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।
इस संबंध में चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के सीईओ यशपाल गर्ग ने बताया कि काफी समय से विभागीय तबादले की प्रक्रिया चल रही थी। लॉकडाउन लगने के बाद इस काम की गति धीमी हो गई थी लेकिन अब जब सभी विभाग खुल गए हैं तो तबादले के आदेश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सीएचबी के लगभग सभी विभागों के कर्मचारियों को इधर से उधर किया गया है।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक विभागों में से एक व दो कर्मचारियों को छोड़कर सभी का विभागीय तबादला किया गया है ताकि रह गए कर्मचारी बाकियों को काम समझाने में मदद कर सकें। सुपरिंटेंडेंट स्तर के अधिकारियों में संजीव गोयल, राजेश सेठी, सुनीता रानी और गौतम सैनी का तबादला किया गया है। इसमें से गौतम सैनी को छोड़कर सभी का तबादला इंजीनियरिंग विभाग में कर दिया गया है।
अब हाउसिंग बोर्ड को रेंट रिकवरी में मिलेगा पांच प्रतिशत शेयर
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) को अब रेंट रिकवरी में पांच प्रतिशत का शेयर मिलेगा। पिछले कई सालों ने सीएचबी की यह डिमांड लंबित थी, जिसे यूटी प्रशासन ने केंद्र के सामने रखा और इसे अब जाकर अंतिम मंजूरी मिल गई है। हाउसिंग बोर्ड को यह हिस्सा शहर में स्मॉल फ्लैट स्कीम के तहत बने मकानों के किराए में मिलेगा।
सीएचबी के चेयरमैन अजॉय कुमार सिन्हा ने बताया कि लंबे समय से बोर्ड को स्मॉल फ्लैट्स स्कीम के तहत होने वाले रेंट रिकवरी में से शेयर देने की मांग चल रही थी, जिस पर अब फैसला हो गया है। इससे पहले पूरी राशि यूटी प्रशासन के जरिए केंद्र सरकार को चली जाती थी।
हाल ही में बोर्ड ने नए नियमों के तहत देरी से रेंट जमा करवाने वालों से बकाया राशि पर वार्षिक 12 प्रतिशत पेनाल्टी वसूलने का फैसला लिया है, क्योंकि कोई पेनाल्टी का प्रावधान न होने के चलते लोग नियमित रूप से स्मॉल फ्लैट्स स्कीम का रेंट जमा नहीं करवा रहे हैं, जिससे करोड़ों रुपये का रेंट बकाया है, जिसकी वसूली बाकी है।
पेनाल्टी के प्रावधान से अब बोर्ड को और अधिक रिकवरी होगी, जिससे सीएचबी को भी अधिक शेयर मिलेगा।