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एजेएल प्लॉट अलॉटमेंट मामले में हुड्डा और वोरा के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल, जानिए मामला

Tue, 27 Aug 2019 10:04 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला
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मोती लाल वोरा, भूपेंद्र सिंह हुड्डा - फोटो : फाइल फोटो
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को जिला अदालत पंचकूला में एसोसिएट जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) मामले में चार्जशीट फाइल कर दी। इस मामले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के अलावा कांग्रेस नेता मोती लाल वोरा भी आरोपी हैं। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉंड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत शिकायत दर्ज कराई थी।
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1992 में हुड्डा सरकार की ओर से एजेएल को पंचकूला के सेक्टर-6 स्थित प्लॉट नंबर-सी 17 की अलॉटमेंट में अनियमितताएं बरतने और मनी लॉंड्रिंग के आरोप हैं। एजेएल नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र का संचालन करती थी। इस पर कांग्रेस नेताओं का नियंत्रण था, जिनमें गांधी परिवार के सदस्य भी शामिल थे।

इससे पहले ईडी करीब 64.93 करोड़ की कीमत के प्लॉट को अटैच कर चुका है, लेकिन ईडी ने मामले में सोमवार को पहली चार्जशीट फाइल की। इससे साफ है कि अब एजेएल के संबंध में कोर्ट में एक केस अलग से चलेगा। बता दें कि इस मामले में पहले ही सीबीआई कोर्ट में केस चल रहा है।
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24 साल बाद पुराने रेट पर किया था प्लाट अलॉट

पंचकूला सेक्टर-6 में 3360 वर्गमीटर का प्लॉट नंबर सी-17 तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल ने 24 अगस्त 1982 को अलॉट कराया था। कंपनी को इस पर 6 माह में निर्माण शुरू कर दो साल में काम पूरा करना था, लेकिन कंपनी 10 साल तक ऐसा नहीं कर पाई। 30 अक्टूबर 1992 को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने अलॉटमेंट कैंसिल कर प्लॉट को रिज्यूम किया। फिर 26 जुलाई 1995 को मुख्य प्रशासक हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने एस्टेट ऑफिसर के आदेश के खिलाफ कंपनी की अपील खारिज कर दी।

14 मार्च 1998 को कंपनी की ओर से आबिद हुसैन ने चेयरमैन हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण को प्लॉट अलॉटमेंट बहाली के लिए अपील की। इस पर 14 मई 2005 को चेयरमैन हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने अफसरों को एजेएल कंपनी के प्लॉट अलॉटमेंट की बहाली की संभावनाएं तलाशने को कहा, लेकिन कानून विभाग ने अलॉटमेंट बहाली से इनकार कर दिया। 18 अगस्त 1995 को नई अलॉटमेंट के लिए आवेदन मांगे गए और एजेएल को भी आवेदन की छूट दी गई।

28 अगस्त 2005 को एजेएल को 1982 की मूल दर पर ही प्लॉट अलॉट करने की फाइल पर साइन कर दिए गए। साथ ही कंपनी को 6 माह में निर्माण कार्य शुरू कर उसे एक साल में पूरा करने को कहा गया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पुराने रेट पर प्लॉट अलॉटमेंट के आदेश दिए थे।

 
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