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Chandigarh News: चंडीगढ़ के युवाओं को नौकरी में कोटा का इंतजार

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चंडीगढ़। चंडीगढ़ में युवाओं के लिए डोमिसाइल आधारित स्टेट कोटा लागू करने की मांग लगातार जोर पकड़ती जा रही है। हरियाणा, पंजाब, हिमाचल सहित कई राज्यों में स्थानीय युवाओं को सरकारी नौकरियों में आरक्षण व प्राथमिकता मिलती है लेकिन केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में पिछले 15 साल से उठ रही यह मांग अब भी अधर में लटकी है।
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शहर की विभिन्न आरडब्ल्यूए, फॉस्वेक, क्रॉफ्ड समेत कई संगठनों ने यह मुद्दा प्रशासक गुलाबचंद कटारिया, सांसद मनीष तिवारी, राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू और मुख्य सचिव तक बार-बार उठाया है। शहर की आरडब्ल्यूए का प्रतिनिधित्व करने वाला क्रॉफ्, चंडीगढ़ प्रशासन में स्थानीय युवाओं के लिए नौकरी में कोटा तय करने की मांग कर चुका है।

किन राज्यों में स्थानीय युवाओं को नौकरी में प्राथमिकता?
उत्तराखंड में क्लास-3 व 4 पदों पर नियुक्ति में केवल उन्हीं उम्मीदवारों को कोटा जिनके पास राज्य का 15 वर्ष का डोमिसाइल रिकॉर्ड हो। महाराष्ट्र में मराठी भाषी और 15 साल का निवास अनिवार्य, कई भर्ती में स्थानीय उम्मीदवारों के लिए प्राथमिकता मिलती है। असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, जम्मू-कश्मीर के कई विभागों में 80% से अधिक पद स्थानीय अथवा ट्राइबल समुदायों के लिए आरक्षित हैं। इन राज्यों का उदाहरण देते हुए चंडीगढ़ के संगठनों का कहना है कि जब बाकी राज्यों में स्थानीय युवाओं को मौके मिल रहे हैं तो चंडीगढ़ क्यों पीछे?
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लोगों की बातें (फोटो सहित)
शहर के युवाओं के लिए कोटा जरूरी, बाहर के उम्मीदवार भर रहे पद
चंडीगढ़ प्रशासन को स्थानीय युवाओं को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देनी चाहिए। सचिवालय, पुलिस, हाउसिंग बोर्ड, डीसी ऑफिस, ट्रांसपोर्ट समेत ज्यादातर विभागों में पंजाब और हरियाणा के लोग भर्ती किए गए हैं। चंडीगढ़ दोनों राज्यों की राजधानी है लेकिन किसी भी राज्य में चंडीगढ़ के युवाओं को कोटा नहीं मिलता। ऐसे में प्रशासन को स्थानीय युवाओं के लिए सीटें आरक्षित करनी चाहिए ताकि उन्हें रोजगार के लिए बाहर न जाना पड़े। -हितेश पुरी, चेयरमैन, क्रॉफ्ड

आर्टिकल 16(3) और 371 के तहत प्रावधान मौजूद, लागू करने की जरूरत
चंडीगढ़ के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर खोलने हेतु डोमिसाइल नीति लागू की जानी चाहिए। संविधान के आर्टिकल 16(3) व 371 इसके लिए आधार प्रदान करते हैं। हमने सांसद सतनाम सिंह संधू को पत्र लिखकर इस मुद्दे को केंद्र के समक्ष रखने का आग्रह किया है। पंजाब और हरियाणा अपनी नौकरियों में चंडीगढ़ के युवाओं को शामिल नहीं करते, इसलिए प्रशासन को खुद आगे आकर नीति बनानी चाहिए। –राजेश राय, रिटायर्ड आईआरएस, प्रेसिडेंट, सेक्टर-43बी आरडब्ल्यूए
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