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ऑनलाइन एजुकेशन पर चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर सतनाम सिंह संधू से विशेष बातचीत, पढ़ें

Tue, 23 Jun 2020 11:28 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
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सतनाम सिंह संधू - फोटो : अमर उजाला
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कोरोना ने आम जनजीवन को ही प्रभावित नहीं किया, शिक्षा प्रणाली को भी हाईटेक बना दिया है। जहां एक ओर सिलेबस पूरा होना भी कठिन लग रहा था, वहां ऑनलाइन शिक्षा ने छात्रों को नया अनुभव दिया है। इससे घर बैठे ऑक्सफोर्ड व हॉवर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों से पढ़ने का असंभव कार्य भी संभव हो गया है। ऑनलाइन शिक्षा को अपनाने में भारतीय कतरा रहे थे, लेकिन महामारी के संकट ने इसे अपनाने को मजबूर कर दिया है।
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हालांकि चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर सतनाम सिंह संधू का मानते हैं कि ऑनलाइन शिक्षा के लिए बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी अपने 30 हजार स्टूडेंट्स को ऑनलाइन एजुकेशन देने के साथ ही उनका टेस्ट भी ऑनलाइन ले रही है। छात्रों व शिक्षकों के इस अनुभव को जानने के लिए अमर उजाला ने यूनिवर्सिटी के चांसलर से ऑनलाइन एजुकेशन पर लंबी चर्चा की।

सवाल: 30 हजार छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाओं को कैसे प्रभावी बनाया?
जवाब:
ऑनलाइन एजुकेशन पर काफी सवाल उठ रहे हैं। किसी छात्र को वीडियो दिखाकर या व्हाट्सएप पर नोट्स भेजना ऑनलाइन एजुकेशन नहीं हैं। वर्चुअल कैंपस का अनुभव कराना ही ऑनलाइन एजुकेशन है। ऐसी प्रणाली जहां बच्चा लैब भी अटेंड करे, पढ़ाई करे और अपने सवाल भी पूछ सके, प्रोजेक्ट हों। हमने वर्चुअल व कैंपस शिक्षा का मिश्रण तैयार कर नई प्रणाली शुरू की है। इसके लिए सबसे भरोसेमंद सॉफ्टवेयर ब्लैकबोर्ड को लिया है, जिससे छात्रों को बेहतर शिक्षा मिल सके।
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सवाल: कॉलेज के प्रोफेसरों को नई तकनीक से कैसे अवगत कराया?
जवाब:
फिजिकल एजुकेशन व ऑनलाइन एजुकेशन में अंतर है। इसके लिए जरूरी है कि एक प्रोटोकॉल तैयार किया जाए। इसमें पहले शिक्षक की ट्रेनिंग होती है, उसके बाद छात्रों की ट्रेनिंग होती है। दोनों जब ऑनलाइन एजुकेशन के लिए तैयार होते हैं तो बेहतर परिणाम आते हैं। क्योंकि अचानक से लाइव लेक्चर, लाइव डेमो देना है, वर्चुअल सिस्टम में जाकर लैब लगाना आसान नहीं होता है। छात्र की ट्रेनिंग होने के बाद वह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को भी बेहतर समझ सकता है।

सवाल: क्या ऑनलाइन के जरिए प्रैक्टिकल संभव है?
जवाब:
फिजिकल शिक्षा का अनुभव ऑनलाइन शिक्षा में कभी नहीं मिल सकता। लेकिन ऑनलाइन शिक्षा में बड़ा फर्क यह है कि कुछ विद्यार्थी जो कक्षा में शिक्षक से पूछने से शर्माते थे, वह भी अब बेझिझक सवाल पूछते हैं। क्योंकि उनका पर्सनल एक कॉलम है। कक्षा खत्म होने के बाद शिक्षक छात्र को व छात्र शिक्षक की रेटिंग करते हैं। इस दौरान छात्र के परिजन भी उसकी कक्षा देख रहे होते हैं। इसलिए फिजिकल कक्षा की अपेक्षा ऑनलाइन कक्षा के अपने फायदे व नुकसान हैं।
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सवाल: क्या भारत ऑनलाइन शिक्षा के लिए तैयार है?
जवाब:
हम अपनी यूनिवर्सिटी में बेहतर से बेहतर शिक्षा छात्रों को देना चाहते हैं। ऐसे में हम सोचते थे कि ऑक्सफोर्ड, हॉवर्ड या अन्य कोई बड़ी विदेशी यूनिवर्सिटी का प्रोफेसर आए और हमारे बच्चों की कक्षा ले, लेकिन यह संभव नहीं था। आज दुनिया की 200 से ज्यादा शीर्ष यूनिवर्सिटी के साथ करार हो चुका है। उनके बेहतर शिक्षकों की सूची हमें मिल गई है। अब हमारे बच्चे अमेरिका, लंदन, ऑस्ट्रेलिया व अन्य देशों की बड़ी यूनिवर्सिटी के शिक्षकों का अनुभव भारत में उठा सकेंगे। भारत में ऑनलाइन शिक्षा का उपयोग नहीं करना चाहते थे, लेकिन अब मांग के अनुसार अपना रहे हैं। यही कारण है कि अब देश की टॉप 100 यूनिवर्सिटी ऑनलाइन डिग्री देने की तैयारी में है।

सवाल: मोबाइल व लैपटॉप का इस्तेमाल बढ़ने से छात्रों के स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ रहा है?
जवाब:
दुनियाभर के रिसर्च उठाकर देख लें तो भारत के लोगों का स्क्रीन टाइम सबसे ज्यादा है। ऐसे में हमें यह तय करना होगा कि किन चीजों के लिए मोबाइल व लैपटॉप जरूरी है और किन चीजों को देखना कम करना है। कक्षाएं फिजिकल एजुकेशन की तरह ही लग रहीं हैं, लेकिन सब ऑनलाइन है। इसलिए विद्यार्थियों और शिक्षकों को सलाह दूंगा कि योग करें। मेडिटेशन करें, जिससे मानसिक व शारीरिक शक्ति बढ़ेगी। मनोरंजन का स्क्रीन टाइम कम करेंगे तो आंखों को भी राहत मिलेगी। इसमें पैरेंट्स का सहयोग जरूरी है।
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