निगम आयुक्त केके यादव ने बताया कि कई बार पेट्रोल-डीजल चोरी की शिकायत आती थी। इसके अलावा कर्मचारी गाड़ियों में पेट्रोल-डीजल न होने का बहाना बनाकर भी क्षेत्र में काम पर नहीं पहुंचते थे। इससे लोगों को तो असुविधा होती ही थी, साथ ही निगम का कार्य भी प्रभावित होता था। इस समस्या से निजात पाने के लिए सभी गाड़ियों में यह सेंसर लगवाने के निर्णय लिया गया है।
इसमें एक चिप पेट्रोल टैंक के अंदर लगाया गया है। इसका एक भाग (रिंग) टैंक के ऊपर लगाया गया है जिससे टैंक में कितना पेट्रोल डाला गया और कितने किलोमीटर में यह खर्च हुआ, इसका पूरा डाटा निगम के कंप्यूटर पर होगा। ऐसे में पेट्रोल-डीजल की चोरी से बचा जा सकेगा, साथ ही कर्मचारियों की कार्य क्षमता में भी वृद्धि होगी।
इस साल के बजट में भी 3 करोड़ का पेट्रोल-डीजल का खर्चा
नगर निगम में गाड़ियों के डीजल-पेट्रोल पर हर साल एक करोड़ रुपये खर्च होता है। इस साल घर-घर से कचरा उठाने के लिए निगम के पास 390 गाड़ियां भी आ गई हैं। निगम ने इस साल गाड़ियों, सामुदायिक केंद्र में लगे जनरेटर, हॉर्टिकल्चर व पब्लिक हेल्थ की मशीनों में पेट्रोल-डीजल के लिए 3 करोड़ रुपये का बजट रखा है।
पिछले साल करनी पड़ी थी पेट्रोल भत्ते में कटौती
कोरोना काल में निगम की वित्तीय हालत खराब थी। इस कारण पिछले साल अधिकारियों व कर्मचारियों की 66 गाड़ियों में 20 प्रतिशत पेट्रोल खर्चे में कटौती करनी पड़ी थी। निगम में मेयर को 300 लीटर, आयुक्त को 250 लीटर, अतिरिक्त आयुक्त व संयुक्त आयुक्त को 225 लीटर व चीफ इंजीनियर को 250 लीटर पेट्रोल मिलता है।
व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने के लिए यह योजना बनाई है। हमारा प्रयास है कि जनता के पैसे का पूरा सदुपयोग हो। -केके यादव, निगम आयुक्त