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चंडीगढ़ निगम की गाड़ियों के टैंक में लगे सेंसर, सॉफ्टवेयर बताएगा-कितना पेट्रोल डलवाया, गाड़ी कितनी चली

Mon, 08 Feb 2021 11:23 AM IST
निवेदिता वर्मा नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ निगम के वाहनों में लगे सेंसर। - फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ नगर निगम की गाड़ियों से अब पेट्रोल व डीजल चोरी नहीं होगा। निगम सभी सरकारी गाड़ियों के पेट्रोल टैंक पर चिप लगवा रहा है। इस चिप का सर्वर सॉफ्टवेयर के माध्यम से कंप्यूटर पर जोड़ा गया है। किस गाड़ी में कितना पेट्रोल-डीजल डला और कितना किलोमीटर चलने पर गाड़ी से यह खर्च हुआ, इसकी पूरी जानकारी अब सर्वर पर रहेगी। 
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निगम के पास मौजूद 500 वाहनों में से 460 गाड़ियों में सेंसर लगाया जा चुका है। बता दें पिछले साल जुलाई में बागवानी विभाग में एक कर्मचारी गोदाम से निजी गाड़ी में तेल डालते हुए पकड़ा गया था। किसी ने इसका वीडियो बना लिया था। वीडियो वायरल होने पर संबंधित व्यक्ति को निलंबित कर दिया गया था। 



 

निगम आयुक्त केके यादव ने बताया कि कई बार पेट्रोल-डीजल चोरी की शिकायत आती थी। इसके अलावा कर्मचारी गाड़ियों में पेट्रोल-डीजल न होने का बहाना बनाकर भी क्षेत्र में काम पर नहीं पहुंचते थे। इससे लोगों को तो असुविधा होती ही थी, साथ ही निगम का कार्य भी प्रभावित होता था। इस समस्या से निजात पाने के लिए सभी गाड़ियों में यह सेंसर लगवाने के निर्णय लिया गया है। 

इसमें एक चिप पेट्रोल टैंक के अंदर लगाया गया है। इसका एक भाग (रिंग) टैंक के ऊपर लगाया गया है जिससे टैंक में कितना पेट्रोल डाला गया और कितने किलोमीटर में यह खर्च हुआ, इसका पूरा डाटा निगम के कंप्यूटर पर होगा। ऐसे में पेट्रोल-डीजल की चोरी से बचा जा सकेगा, साथ ही कर्मचारियों की कार्य क्षमता में भी वृद्धि होगी। 
 

निगम में गाड़ियों की स्थिति 
निगम के पास कुल 500 वाहन हैं। इनमें एमओएच विभाग में 255, फायर विभाग में 48, पब्लिक हेल्थ विभाग में 60, बीएंडआर विभाग में 42, बागवानी व इलेक्ट्रिकल विभाग में 63 और कमिश्नर ऑफिस में 32 गाड़ियां हैं। निगम ने 460 गाड़ियों में सेंसर लगा दिया है। शेष गाड़ियों पर भी सेंसर लगाने का काम जारी है। 

पार्षद भी करते हैं शिकायत 
सदन की बैठक में पार्षदों ने मुद्दा उठाया था कि निगम के कर्मचारियों से कचरा उठाने, बागवानी विभाग के कर्मचारियों से किसी काम की कहो तो कर्मचारियों का कहना होता है कि गाड़ी में पेट्रोल-डीजल नहीं है। हमारे बिल पास नहीं हुए। इस पर निगम आयुक्त हमेशा कहते थे यह स्थिति कहीं नहीं है कि पेट्रोल-डीजल की कमी से गाड़ी खड़ी हो। 

सिटको से बनवा लेते थे मनमर्जी की पर्ची 
अभी तक कर्मचारी सिटको के पेट्रोल पंप से पेट्रोल-डीजल लेकर इसकी पर्ची बनवा लेते थे। वह पर्ची अपने विभाग में जमा करते थे। उसके बाद सिटको को भुगतान होता था। इसमें घालमेल की काफी आशंका रहती थी। हालांकि अब निगम के पेट्रोल पंप होने से वहीं निगम की गाड़ियों में पेट्रोल-डीजल डलवाया जाता है। 
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इस साल के बजट में भी 3 करोड़ का पेट्रोल-डीजल का खर्चा 
नगर निगम में गाड़ियों के डीजल-पेट्रोल पर हर साल एक करोड़ रुपये खर्च होता है। इस साल घर-घर से कचरा उठाने के लिए निगम के पास 390 गाड़ियां भी आ गई हैं। निगम ने इस साल गाड़ियों, सामुदायिक केंद्र में लगे जनरेटर, हॉर्टिकल्चर व पब्लिक हेल्थ की मशीनों में पेट्रोल-डीजल के लिए 3 करोड़ रुपये का बजट रखा है। 

पिछले साल करनी पड़ी थी पेट्रोल भत्ते में कटौती 
कोरोना काल में निगम की वित्तीय हालत खराब थी। इस कारण पिछले साल अधिकारियों व कर्मचारियों की 66 गाड़ियों में 20 प्रतिशत पेट्रोल खर्चे में कटौती करनी पड़ी थी। निगम में मेयर को 300 लीटर, आयुक्त को 250 लीटर, अतिरिक्त आयुक्त व संयुक्त आयुक्त को 225 लीटर व चीफ इंजीनियर को 250 लीटर पेट्रोल मिलता है। 

व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने के लिए यह योजना बनाई है। हमारा प्रयास है कि जनता के पैसे का पूरा सदुपयोग हो। -केके यादव, निगम आयुक्त

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