देश में जल्द ही ऐसी कोरोना वैक्सीन सामने आएगी जो माइनस 70 डिग्री तापमान की बजाय कमरे के तापमान पर काम करेगी। इस पर आईआईएससी बैंगलोर का आणविक बायोफिजिक्स विभाग शोध कर रहा है। इस रिसर्च को प्रो. आर वर्धराज आगे बढ़ा रहे हैं। भारत सरकार को क्लिनिकल ट्रायल के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी के बाद आगे का कार्य शुरू होगा।
यह जानकारी चंडीगढ़ में पंजाब यूनिवर्सिटी, नवाचार और ज्ञान क्लस्टर की ओर से 14वीं चंडीगढ़ साइंस कांग्रेस में दी गई। इस तीन दिवसीय ऑनलाइन चेसकॉन 2020 कांफ्रेंस में देश-दुनिया के वैज्ञानिक हिस्सा ले रहे हैं। पहले दिन वैज्ञानियों ने कोरोना से लेकर अंतरिक्ष मिशन पर बात की।
कोरोना का टीका विकसित करने की थी बड़ी चुनौती
एनआईआई नई दिल्ली के निदेशक प्रो. अमूल्य के पांडा ने टीकों के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि कोरोना के दौरान टीका विकसित करने की बड़ी चुनौती थी, लेकिन अब टीका लगभग तैयार है, जो जल्द सबके सामने होगा। उन्होंने कहा कि टीकों को बाजार में आने में काफी समय लगता है, लेकिन वैज्ञानिकों ने इस पर तेजी से काम किया। प्रोफेसर एमआरएन मूर्ति, एस्ट्राजेनेका चेयर, इंस्टीट्यूट ऑफजैव सूचना विज्ञान और एप्लाइड बायोटेक्नोलॉजी बैंगलोर ने इस पर एक अद्भुत बात की। उन्होंने एंटी वायरल दवा कोरोनवीर की संरचना के बारे में बताया। साथ ही सार्स कोव-2 के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इसका संक्रमण तेजी से फैला। इस संक्रमण की दर पिछले संक्रमणों से अधिक रही है।
अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए आगे आएं युवा
वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों से कहा कि ग्रहों के विज्ञान की पढ़ाई करें और अंतरिक्ष अनुसंधान को आगे बढ़ाएं। यह क्षेत्र विस्तृत है। वैज्ञानिकों की इस फील्ड को और आवश्यकता है। इसके जरिए बेहतर भविष्य बनाया जा सकता है। मिशन मंगल से लेकर चंद्रयान टू पर भी वैज्ञानिकों ने बात की। समन्वयक प्रो. देश दीपक ने पूरे कार्यक्रम पर प्रकाश डाला और आभार जताया।
पीयू के डीन साइंस प्रो. प्रिंस शर्मा ने चंडीगढ़ साइंस कांग्रेस के इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इसके जरिये विद्यार्थियों के विचारों को पंख मिलते हैं। वह प्रेरित होकर इनोवेशन की ओर कदम बढ़ाते हैं। प्रोफेसर अनिल भारद्वाज, निदेशक, फिजिकल रिसर्च लैब, अहमदाबाद ने पहले सत्र का शुभारंभ किया। उन्होंने भारतीय योजना आयोग के विषय पर बात की। अंतरिक्ष मिशन के विभिन्न पहलुओं, मिशन मंगल, चंद्रमा, सौर पवन आदि के बारे में बताया। चंद्रयान दो की सफलता पर भी अनुभव साझा किए।
प्रो. अनिल ने भी मंगलयान की सफलता पर बात की। छात्रों से कहा कि वह ग्रहों के विज्ञान में शामिल हों। इसके लिए अंतरिक्ष अनुसंधान में आने का मौका मिलेगा, लेकिन इसके लिए जिज्ञासा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ने पहले छह महीने के लिए उपग्रह भेजा था, लेकिन अब वही उपग्रह अंतरिक्ष में छह साल तक बना रहेगा। इसलिए अनुसंधान के बहुत मौके मिलेंगे।
कोरोना वैक्सीन के लिए इम्युनोजेन डिजाइन के बारे में दी जानकारी
प्रमुख वैज्ञानिक प्रो. आर वर्धराजन आणविक बायोफिजिक्स यूनिट, आईआईएससी, बंगलुरू ने कोरोना वैक्सीन के लिए इम्युनोजेन डिजाइन पर जानकारी दी। उन्होंने अब तक पेश किए जा रहे कोरोना वैक्सीन के प्रकार क्या हैं और हम कैसे संक्रमण के खिलाफ लड़ सकते हैं, के बारे में भी बताया। जीएमसीएच- 32 के चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर रवि गुप्ता ने क्लिनिकल मैनेजमेंट और इनोवेशन के लिए आगे बढ़ने पर बात की। प्रो. पाउला विदिरा, ग्लाइकोइम्यूनोलॉजी समूह आदि ने भी अपने विचार रखे।