चंडीगढ़। पेंडू संघर्ष कमेटी की ओर से सोमवार को सेक्टर-17 के प्लाजा में किसानों के समर्थन में धरना-प्रदर्शन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और किसानों की मांगों को पूरा करने की अपील की। यह प्रदर्शन किसान आंदोलन चला रहे किसान संगठनों के आह्वान पर किया गया। वहीं, पेंडू संघर्ष कमेटी के एक प्रतिनिधिमंडल ने चंडीगढ़ के उपायुक्त को किसानों की मांगों का एक मांग पत्र भी सौंपा।
धरना-प्रदर्शन के दौरान पेंडू संघर्ष कमेटी के महासचिव गुरप्रीत सिंह सोमल ने घोषणा की कि 16 दिसंबर को चंडीगढ़ के सभी गांवों से एक साथ जत्था किसानों के समर्थन में सिंघु बॉर्डर के लिए रवाना होगा। सभी लोग सेक्टर-34 के गुरुद्वारा साहिब के मैदान में एकत्र होंगे और वहीं से वाहनों के काफिले और लंगर का सामन लेकर रवाना होंगे। गुरप्रीत सिंह सोमल ने बताया कि आज के धरने से पहले पांच दिन गांव में मार्च किया और अलग-अलग तरह की बैठकें की गईं। इन बैठकों में लोगों को किसान आंदोलन के बारे में जानकारी दी गई। प्रदर्शन में गांव के अलावा अन्य संगठनों के लोग भी शामिल रहे। प्रदर्शन की अगुवाई पेंडू संघर्ष कमेटी के प्रधान नंबरदार दलजीत सिंह पलसौरा, संरक्षक बाबा साधु सिंह सारंगपुर और बाबा गुरदियाल सिंह खुड्डा अलीशेर ने की।
इस दौरान मांग की गई कि तीनों नए कृषि कानूनों और बिजली संशोधन बिल को सरकार वापस ले। साथ ही वातावरण पर अध्यादेश वापस ले। सोमल ने बताया कि धरने में मुख्य एजेंडा जोगा सिंह कजहेड़ी ने पेश किया। धरने को पेंडू संघर्ष कमेटी के नेताओं में जोगिंदर सिंह, अमरीक सिंह, सुखजीत सिंह, हरजिंदर कौर, प्रिंसिपल रंजीत सिंह बुड़ैल, भूपिंदर सिंह, जत्थेदार नैब सिंह, शरणजीत सिंह रायपुरकलां,अमरजीत सिंह मलोया, करम सिंह मनीमाजरा के अलावा लखविंदर सिंह, हरवंश सिंह ने संबोधित किया। कनाडा से विशेष रूप से आए जसविंदर सिंह सिद्धू, गुरनाम सिंह सिद्धू, चंडीगढ़ पंजाबी मंच के महासचिव देवी दयाल शर्मा, अमनदीप कौर, सुखविंदर कौर, स्वर्ण कौर, सुरिंदर कुमार, पुनीत, मनविंदर पाल सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
प्रधानमंत्री के लिए अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने पर भाषण देेने से रोका
मनीमाजरा के एक प्रतिनिधि सतवंत सिंह ढिल्लों को धरने से संबोधन के दौरान हटा दिया गया। उन्हें बीच में ही बोलने से रोक दिया गया। पीएम के लिए अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने के कारण उन्हें बीच में ही बोलने से मना कर दिया गया।