जब पूरा देश कोविड 19 महामारी से लड़ रहा है खासकर स्वास्थ्य, सफाई और बिजली सेक्टर में लगे सरकारी कर्मचारी कोरोना वॉरियर्स की अहम भूमिका अदा कर रहे हैं और ऐसे संकट के दौर में बिजली विभाग को निजी हाथों में देने पर प्रशासन क्यों आतुर है, इसे लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यह सवाल प्रशासन के कई अधिकारियों से पूछा गया, जिस पर ज्यादातर का कहना था कि यह फैसला केंद्र सरकार का है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने पीएम मोदी के 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज पर चौथी प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली वितरण का निजीकरण करने की घोषणा की थी।
कंपनिया सेवा करने नहीं, मुनाफा कमाने आएंगी
चंडीगढ़ का बिजली विभाग पहले ही काफी बेहतर काम कर रहा है। प्रशासन भले कह रहा है कि बिजली के निजीकरण से कोई असर नहीं पड़ेगा लेकिन हकीकत यह है कि प्राइवेट कंपनियां सेवा करने शहर में नहीं आएंगी, बल्कि मुनाफा कमाने के लिए काम करेंगी। ऐसे में जब पंजाब, हरियाणा के मुकाबले शहर की बिजली सस्ती है तो क्या गारंटी है कि दाम नहीं बढ़ाए जाएंगे। - गोपाल दत्त जोशी, जनरल सेक्रेटरी, यूटी पावरमैन यूनियन (चंडीगढ़)
बिजली विभाग के निजीकरण से नुकसान होना तय
बिजली के निजीकरण को लेकर शुरू में कई फायदे गिनाए जाएंगे लेकिन बाद में कंपनियां अपना मुनाफा देखेंगी। निजीकरण से नुकसान होना तय है। कर्मचारियों को भी कई तरह की मुश्किलों का कामना करना पड़ेगा। नगर निगम के कॉरपोरेशन बनने के वक्त कई तरह के सपने दिखाए गए थे, लेकिन आज हकीकत यह है कि नगर निगम के पास अपने कर्मचारियों को सैलरी देने तक के पैसे नहीं है। - बलविंदर सिंह, प्रेसिडेंट, चंडीगढ़ सब-ऑर्डिनेट सर्विसेज फेडरेशन (यूटी)
केंद्र सरकार ने सभी केंद्र शासित प्रदेशों के बिजली के निजीकरण का फैसला किया है। चंडीगढ़ में भी इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। जनवरी 2021 तक का समय है लेकिन हम इससे पहले निजीकरण की प्रक्रिया को पूरा कर लेंगे। - मनोज परिदा, एडवाइजर