पुलिस अधिकारियों की भूमिका के खिलाफ बड़े अफसर को सौंपी गई जांच बीरबल की खिचड़ी साबित हो रही है। मामला है दसवीं की नाबालिग छात्रा से पांच कांस्टेबलों द्वारा दुराचार और छेड़छाड़ करने का।
पुलिस कर्मियों की करतूत को उजागर करने वाली पीड़िता के भाई ने आईजी को पत्र लिखकर बताया था कि शिकायत दर्ज कराते समय उस पर पुलिस अधिकारियों ने समझौते के लिए दबाव बनाया था।
साथ ही आरोपियों को पीड़िता के सामने ही कुर्सी पर बैठाया गया और उन्होंने भी उस पर दबाव बनाया। जांच अधिकारी पर भी पीड़िता से दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया था।
इस पत्र को गंभीरता से लेते हुए आईजी आरपी उपाध्याय ने इसकी जांच एसएसपी ट्रैफिक को सौंपी थी। उन्होंने सभी आरोपों के साथ जांच अधिकारी की भूमिका की भी जांच करने को कहा था।
साथ ही जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट देने की भी ताकीद थी। मगर अभी तक जांच रिपोर्ट आईजी को नहीं सौंपी गई है। दूसरी ओर एसएसपी ट्रैफिक का कहना है कि अभी मामले की जांच चल रही है।
क्या हुआ था
पीड़िता के भाई का पत्र मिलते ही आईजी ने मामले की जांच कर रही एसआईटी को ही बदल दिया था। डीएसपी आशीष कपूर की जगह पर कमल मीणा को प्रभारी नियुक्त किया गया था।
नई एसआईटी भी इस मामले में चालान पेश नहीं कर पाई है। पुलिस के अनुसार चालान पेश करने के लिए तीन माह का समय है और इसी माह में जिला अदालत में चालान पेश कर दिया जाएगा।
भाई के पत्र में ये थे मुख्य आरोप
- थाने में मौजूद पुलिस वालों ने पीड़िता बहन से कहा कि वह सभी आरोपियों से समझौता कर ले।
- पीड़िता का बयान भी आरोपी पुलिस वालों की मौजूदगी में लिया गया।
-बयान लेते वक्त दोनों मुख्य आरोपियों को कुर्सी पर बैठाया गया और पीड़िता तथा उसके भाई को नीचे कोने में बैठने को मजबूर किया।
- जांच अधिकारी ने टिप्पणी की थी कि यह मामला तो प्रेम प्रसंग टूटने का है।
क्या करना था एसएसपी ट्रैफिक को
-जांच अधिकारी की भूमिका की जांच
-एसआईटी से पहले की जांच को लेकर जो आरोप लगे उनके संबंध में एक्शन टेकन रिपोर्ट।
-मामले को हेंडल करते समय जो खामियां रह गईं उनकी भी जांच की जाए।
कोट
जांच अभी चल रही है। जल्द ही सारे तथ्यों के साथ पूरी रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।
-मनीष चौधरी, एसएसपी ट्रैफिक