पंजाब कला भवन में नाटक का मंचन करते कलाकार। अमर उजाला
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चंडीगढ़। पंजाब कला भवन के ओपन थिएटर में बुधवार शाम को टीएफटी फेस्ट के अंतिम दिन नाटक संध्या छाया का मंचन किया गया। नाटक की कहानी को जयंत दलवी ने लिखा है। यह कहानी एक बूढ़े मां-बाप पर आधारित है, जो अपनी पूरी जिंदगी अपने बच्चों की परवरिश में निकाल देते हैं और उनके बच्चे उन्हें छोड़कर विदेश चले जाते हैं। मजबूरन माता-पिता अकेले ही घर में जिंदगी बिताते हैं।
इस नाटक का निर्देशन सुदेश शर्मा ने किया है। नाटक की कहानी रेलवे में सेवानिवृत्त एक अधिकारी और उनकी पत्नी की है। नाटक में बेस फोन, रेडियो और पाकिस्तान से युद्ध आदि से यह सन् 1999 के आसपास की कहानी जान पड़ती है। नाटक में दिखाया गया कि दंपती अकेले घर में रह रहे हैं। उनके दो बेटे हैं। एक अमेरिका में और दूसरा सेना में कार्यरत है। इसमें शहर में अकेले नौकर के साथ एकाकी जीवन बिता रहे माता-पिता की समस्याओं को दिखाया गया है। विदेश में रह रहा बेटा दोस्त के हाथ माता-पिता के लिए रुपए भेजता है। दोस्त से माता-पिता को पता चलता है कि उनके बेटे ने विदेश में शादी कर ली है। इससे दंपती को काफी धक्का लगता है। जब उनकी बेटे से फोन पर बात होती है तो वह सिर्फ रुपयों की बात करता है, उनके बारे में और उनसे मिलने आने का कोई जिक्र नहीं करता। यही सब चिंताएं दंपती को अंदर ही अंदर खा जाती हैं। तभी नाटक में दिखाया कि पाकिस्तान के साथ युद्ध होता है और छोटा बेटा शहीद हो जाता है। इसी बीच जीवन की जद्दोजहद से परेशान दंपती जीवन समाप्त करने का निर्णय लेते हैं। नाटक में सुदेश शर्मा, मधु बाला, गुरजिंदर सिंह, नवदीप बाजवा, प्रिया शर्मा, नवी, मुकुल मेहता ने शानदार अभिनय किया है।