फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandigarh: नए कानूनी बदलावों को लागू करेगी चंडीगढ़ पुलिस, कांस्टेबल से लेकर अफसरों का होगा रिफ्रेशर कोर्स

Fri, 29 Dec 2023 03:02 PM IST
निवेदिता वर्मा बृजेंद्र गौड़, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

चंडीगढ़ पुलिस के कांस्टेबल रैंक से लेकर डीएसपी रैंक तक के अफसर को इन नए कानूनी बदलावों को लेकर कोर्स के माध्यम से जानकारी दी जाएगी। वहीं नए बदलावों को लेकर लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। चंडीगढ़ इन तीनों नए कानूनों को लागू करने में अग्रणी होगा और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों व राज्यों के लिए एक आदर्श स्थापित हो सकता है।
विज्ञापन
Chandigarh Police - फोटो : Amar Ujala Graphics
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हाल ही में संसद द्वारा पारित तीन विधेयकों को कानूनी रूप देने के बाद इन्हें सबसे पहले लागू करने और अभ्यास में लाने की जिम्मेदारी चंडीगढ़ पर है। शहर के आईजीपी राज कुमार सिंह का कहना है कि जल्द चंडीगढ़ पुलिस के जवानों को भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता व भारतीय साक्ष्य अधिनियम को लेकर बारीकी से जानकारी दी जाएगी।

विज्ञापन


उन्होंने बताया कि पुलिसकर्मियों के लिए विशेष रूप से रिफ्रेशर कोर्स रखे जाएंगे ताकि नई कानूनी व्यवस्था के अंतर्गत ही वह कार्रवाई करें। नव वर्ष में जल्द नए कानूनी बदलावों को शहर में लागू करने की दिशा में काम होगा। जानकारी के मुताबिक शहर में नए वर्ष से नए कानूनी बदलावों के तहत आपराधिक मामलों में कार्रवाई को लेकर शहर के डीजीपी स्टैंडिंग ऑर्डर भी जारी कर सकते हैं। इस प्रकार के आर्डर जारी करने के लिए वह सक्षम हैं।

वहीं दूसरी ओर केंद्र भी जल्द इस नई कानूनी व्यवस्था को लागू करने संबंधी आदेश जारी कर सकता है। चंडीगढ़ इन तीनों नए कानूनों को लागू करने में अग्रणी होगा और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों व राज्यों के लिए एक आदर्श स्थापित हो सकता है।
विज्ञापन


आईजी राज कुमार सिंह ने कहा कि चंडीगढ़ पुलिस के कांस्टेबल रैंक से लेकर डीएसपी रैंक तक के अफसर को इन नए कानूनी बदलावों को लेकर कोर्स के माध्यम से जानकारी दी जाएगी। वहीं नए बदलावों को लेकर लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) भी तैयार किया जा रहा है।

जिला अदालत के साथ भी तालमेल 
जानकारी के मुताबिक चंडीगढ़ पुलिस जिला अदालत के साथ भी तालमेल कर रही है। बता दें कि आरोपियों की सीधे वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेशी को लेकर थानों में मूलभूत ढांचा स्थापित करने की कार्रवाई भी की जा रही है। इससे एक ओर आरोपियों को लाने-ले जाने में होने वाला खर्च और समय बचेगा। नए कानूनी बदलावों के तहत अदालतों को पूरी तरह कंप्यूटरीकृत करने पर जोर दिया जा रहा है। वहीं पुलिस और अदालत के संबंधित कर्मियों-अधिकारियों को भी नए कानूनों की जानकारी दी जा रही है। साफ्टवेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम किया जा रहा है।

यह बदलाव हुआ है
भारतीय दंड संहिता में जहां 511 धाराएं थी वहीं भारतीय न्याय संहिता में 358 धाराएं रह गई हैं। संशोधन के जरिए इसमें 20 नए अपराध शामिल किए हैं, तो 33 अपराधों में सजा अवधि बढ़ाई है। 83 अपराधों में जुर्माने की रकम भी बढ़ाई है। 23 अपराधों में अनिवार्य न्यूनतम सजा का प्रावधान है। छह अपराधों में सामुदायिक सेवा की सजा का प्रावधान किया गया है। 

इसी तरह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में सीआरपीसी की 484 धाराओं के बदले 531 धाराएं हैं। वहीं 177 प्रावधान बदले गए हैं जबकि नौ नई धाराएं और 39 उप-धाराएं जोड़ी हैं। इसके अलावा 35 धाराओं में समय सीमा तय की गई है। नए भारतीय साक्ष्य अधिनियम में 170 प्रावधान हैं। इससे पहले वाले कानून में 167 प्रावधान थे। नए कानून में 24 प्रावधान बदले हैं।

चंडीगढ़ में नए कानूनी प्रक्रिया को लेकर कांस्टेबल से लेकर बड़े रैंक के अधिकारियों के लिए रिफ्रेशर कोर्स रखे जाएंगे। वहीं थानों में भी वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा स्थापित करने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। - राज कुमार सिंह, आईजीपी, चंडीगढ़ पुलिस।
 

नए कानूनी बदलावों में यह खास

  • दुष्कर्म के मामलों में दोषी पाए जाने पर कम से कम 10 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। इसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है। 18 साल से कम उम्र की नाबालिग से गैंगरेप के मामले में आजीवन कारावास से फांसी तक का प्रावधान है।
  • शादी के नाम पर गुमराह करने या पहचान छिपाकर शादी करने पर 10 साल तक की सजा होगी। धोखाधड़ी या झूठ बोलकर किसी महिला से शादी करने या फिर शादी का झांसा देकर यौन संबंध बनाने पर सजा का प्रावधान किया गया है।
  • मॉब लिंचिंग के दोषी को फांसी की सजा तक देने की व्यवस्था की गई है। इसके तहत पांच या उससे ज्यादा लोग जाति, नस्ल या भाषा के आधार पर हत्या करते हैं तो आजीवन कारावास से लेकर फांसी की सजा तक मिल सकती है।
  • भगोड़े अपराधियों पर सख्ती की जाएगी। उनकी गैरमौजूदगी में कोर्ट में ट्रायल भी हो सकेगा। अब फरार घोषित अपराधी के बगैर भी मुकदमा चल सकेगा। फरार आरोपी पर आरोप तय होने के तीन महीने बाद ट्रायल शुरू हो जाएगा।
  • देश में कहीं भी जीरो एफआईआर दर्ज करवा सकेंगे। इसमें धाराएं भी जुड़ेंगी। अब तक जीरो एफआईआर में धाराएं नहीं जुड़ती थी। 15 दिन के भीतर जीरो एफआईआर संबंधित थाने को भेजनी होगी।
  • गवाहों की सुरक्षा का भी ख्याल रखा जाएगा. बयान दर्ज करने और साक्ष्य एकत्र करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक मोड की अनुमति दी गई है।
  • जो महिला शिकायतकर्ता पुलिस स्टेशन नहीं जाना चाहतीं, उनके लिए इलेक्ट्रॉनिक एफआईआर की सुविधा शुरू की गई है और एक पुलिस अधिकारी 24 घंटे के भीतर घर जाएगा।
  • पुलिस को 90 दिन में चार्जशीट दाखिल करनी होगी। परिस्थिति के आधार पर अदालत 90 दिन का समय और दे सकती है। अदालत को 60 दिन के भीतर आरोपी पर आरोप तय करने होंगे। सुनवाई पूरी होने के बाद 30 दिन के अंदर फैसला सुनाना होगा।
  • सात साल या उससे अधिक की सजा वाले अपराधों के लिए विशिष्ट प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिससे फोरेंसिक जांच अनिवार्य हो जाएगी।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें