फिरोजपुर के रिटायर्ड सिविल सर्जन डॉ. जी एस ढिल्लों
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जज्बे के सामने उम्र मायने नहीं रखती। इस बात को पंजाब के एक सेवानिवृत्त सर्जन ने साबित कर दिखाया है। फिरोजपुर के रिटायर्ड सिविल सर्जन डॉ. जी एस ढिल्लों ने 70 साल की उम्र में धर्मशाला, संगरूर व फिरोजपुर में होने वाली खेल प्रतियोगिता में सात गोल्ड, एक सिल्वर व एक कांस्य पदक जीते हैं। डॉ. ढिल्लों का कहना है कि खेलते रहने से व्यक्ति बूढ़ा नहीं होता और बीमारी उसके करीब नहीं आती।
डॉ. ढिल्लों ने बताया कि उनकी आयु 70 साल से अधिक है। वह रोजाना सुबह दौड़ लगाते हैं। इसके अलावा डिस्कस थ्रो, गोला फेंक व भाला फेंक का अभ्यास भी करते हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में धर्मशाला में हुई नेशनल एथलीट मीट में उन्होंने हिस्सा लिया था। उनकी उम्र के बहुत से खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में भाग लिया। ढिल्लों ने डिस्कस थ्रो, गोला फेंक व भाला फेंक मुकाबले में तीन गोल्ड मेडल जीते हैं। इसी तरह कुछ दिन पूर्व फिरोजपुर में हुई जिला एथलीट मीट में भी डिस्कस थ्रो, गोला और भाला फेंक प्रतियोगिता में तीन गोल्ड मेडल जीते हैं।
इसके अलावा संगरूर में हुई स्टेट एथलीट मीट में हिस्सा लिया। इसमें गोला फेंक मुकाबले में एक गोल्ड पदक, भाला फेंक प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल और डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक जीता है। कुल मिलाकर तीन प्रतियोगिताओं में सात गोल्ड मेडल समेत नौ पदक जीते हैं। ढिल्लों ने कहा कि किसी भी प्रकार का खेल खेलने से व्यक्ति स्वस्थ रहता है।