भर्ती फर्जीवाड़े का आरोपी गिरफ्तार
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चंडीगढ़ के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) सेक्टर-32 के 182 नर्सिंग अफसरों की भर्ती में सामने आए फर्जीवाड़े में पुलिस ने तीसरे आरोपी व बिचौलिया मुकेश (28) को राजस्थान के जोधपुर से गिरफ्तार कर लिया है। सूत्रों के मुताबिक मुकेश ने पहले पकड़े गए रेखराज को नर्सिंग अफसर की परीक्षा पास करवाने के लिए 10 लाख रुपये में डील की थी, जिसके बाद रेखराज की जगह जोगिंदर परीक्षा देने आया था। उसे जिला अदालत में पेश कर एक दिन का पुलिस रिमांड लिया गया है। वहीं, पहले पकड़े गए दोनों आरोपियों का पांच दिन का रिमांड खत्म होने के बाद शुक्रवार को अदालत में पेश किया गया जहां से दोनों का एक-एक दिन का रिमांड लिया गया है। पुलिस अब तीनों आरोपियों को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करेगी।
मामले में शुरुआत में पुलिस ने आठ सफल अभ्यर्थियों को आरोपी के रूप में नामजद किया था। वहीं अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने आए आरोपियों की धरपकड़ भी की जा रही है। जीएमसीएच-32 की डायरेक्टर प्रिंसिपल जसपिंदर कौर की शिकायत पर सेक्टर-34 थाना पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश रचने की धाराओं में केस दर्ज किया था। इसके बाद मामले में राजस्थान के झुझनूं जिले के गुडा गांव निवासी जोगिंदर कुमार (28) और जोधपुर के रेखराज (30) को गिरफ्तार किया गया था। रेखराज जीएमसीएच में ज्वाइन भी कर चुका था। उसकी जगह जोगिंदर पेपर देने आया था। वह खुद जोधपुर में नर्सिंग असिस्टेंट के रूप में कार्यरत था।
बता दें कि दिसंबर, 2021 में नर्सिंग अफसरों की भर्ती निकाली गई थी। इसके लिए 28 अगस्त, 2022 को लिखित परीक्षा हुई थी। इसमें 10 हजार से ज्यादा परीक्षार्थी बैठे थे। चंडीगढ़ में 39 केंद्रों में यह परीक्षा आयोजित हुई थी। परीक्षा में मेरिट पर आने वाले अभ्यर्थियों को दस्तावेजों के सत्यापन और काउंसलिंग के लिए बुलाया गया था। दस्तावेजों की छंटनी के बाद चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र दिए गए थे। मामले में अस्पताल के सतर्कता विभाग के कर्मियों ने एक उम्मीदवार की फोटो और दस्तखत में गड़बड़ी पाई, जिसके बाद मामले में आगे जांच की गई। उम्मीदवार के चेहरे में भी फर्क पाया गया था। मामले में और भी उम्मीदवारों के संबंध में गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए छह सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी। इसके लेकर आईटी विभाग से भी डाटा लिया गया। छंटनी के दौरान हाल ही में भर्ती पांच नर्सिंग अफसर कमेटी के समक्ष पेश ही नहीं हुए और अपने इस्तीफे भेज दिए।