गर्भावस्था के दौरान शिशु के संक्रमण को जांचने वाला टेस्ट पीजीआई में पिछले डेढ़ महीने से बंद हैं। जांच के लिए करीब 150 से अधिक सैंपल लंबित पड़े हैं। जो सक्षम हैं, वे प्राइवेट अस्पतालों में जांच करा लेते हैं, लेकिन जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं, उन्हें पीजीआई में किट के आने का इंतजार है।
इस मामले में पीजीआई के वायरोलॉजी डिपार्टमेंट का कहना है कि किट समाप्त हो चुकी है। नई किट का आर्डर दिया जा चुका है, लेकिन वे अब तक अस्पताल नहीं पहुंची है, इसलिए जांच प्रभावित हुए हैं। प्राइवेट लैब में इन जांचों की कीमत करीब 700 रुपये है।
संक्रमण से जान जा भी जा सकती है
एचएसवी (हरपेस सिप्लेक्स वायरस) जांच गर्भावस्था के दौरान भ्रूण और नवजात का किया जाता है। इस जांच की मदद से यह पता लगाया जाता है कि गर्भ में पल रहे बच्चे को कोई संक्रमण तो नहीं है। यदि जन्म के समय संक्रमण का पता न चले तो नवजात की मौत भी हो सकती है या फिर उसे किसी शारीरिक विकलांगता का सामना करना पड़ सकता है।