पीजीआई के न्यूरोसाइंस लैब में 2012 में एडवांस्ड जेनेटिक टेस्ट की सुविधा शुरू हुई थी। 2012-13 की एनुअल रिपोर्ट बताती है कि एक साल में कुल 53 जेनेटिक टेस्ट किए गए। लेकिन संस्थान से पूछे एक सवाल के जवाब में पीजीआई ने कहा कि उसके पास क्वालिफाइड जेनेटिस्ट नहीं है। इसलिए यहां पर न्यूरो जेनेटिक टेस्ट नहीं हो रहे।
जांच में पता चला कि न्यूरोसाइंस की लैब में टेस्ट की सुविधा और किट भी मौजूद है। लेकिन लैब तक मरीज पहुंच नहीं पा रहे। जनवरी 2015 से अब तक एक भी मरीज का लैब में जेनेटिक टेस्ट नहीं हुआ है। मरीजों को पीजीआई से बाहर की लैब से टेस्ट कराने पड़ते हैं।
इसलिए पीजीआई में चाहते हैं टेस्ट कराना
न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट की न्यूरोसाइंस लैब का अपना महत्व है। लैब को नेशनल एक्रीडिशन बोर्ड ऑफ लेबोरेट्री (एनएबीएल) की मान्यता है। मरीजों को कम खर्च व कम समय में ही टेस्ट रिपोर्ट मिल जाती है। इसमें न्यूरोलॉजिक डिसऑर्डर से जुड़ी 27 जेनेटिक बीमारियों के टेस्ट होते हैं।
टेस्ट में कोई गड़बड़ न हो इसके लिए एक अन्य एजेंसी से जांच रिपोर्ट क्रॉस चेक कराई जाती है। यही नहीं कई देशों ने भी लैब में टेस्ट की मंजूरी मांगी है। इसमें आस्ट्रेलिया, यूके, अफ्रीका, श्रीलंका और अमेरिका जैसे देश शामिल हैं।
‘न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के पास क्वालिफाई जेनेटिस्ट नहीं’
पीजीआई की प्रवक्ता मंजू वडवालकर ने जवाब में कहा है कि पीजीआई के न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के पास क्वालिफाई जेनेटिस्ट नहीं है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की गाइडलाइंस के मुताबिक टेस्ट के लिए क्वालिफाई जेनेटिस्ट का होना जरूरी है। लैब की जब ओपनिंग हुई थी, तब भी कोई जेनेटिस्ट नहीं था।
पीजीआई के बाहर स्थित लैबों में भी जेनेटिस्ट नहीं हैं। हालांकि इससे पहले एक मामले में पीजीआई की ओर से कहा गया था कि पीजीआई में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के नॉर्म्स लागू नहीं होते। यह बयान उस दौरान आया था, जब असिस्टेंट प्रोफेसर को एचओडी बनाने के मुद्दे पर कुछ जर्नलिस्ट ने सवाल पूछे थे।
आपसी विवाद का खामियाजा मरीज को
दरअसल पीजीआई के न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के मौजूदा विभागाध्यक्ष और न्यूरोसाइंस लैब के साइंटिस्ट के बीच कई दिनों से विवाद चल रहा है। कुछ विभागाध्यक्ष की ओर से आरोप लगाए गए तो कुछ साइंटिस्ट की ओर से। अलग-अलग मामलों की जांच भी चल रही है। इसमें सीधा नुकसान लैब और मरीजों का हो रहा है।
23 सौ के टेस्ट 15 हजार में
पीजीआई की वेबसाइट के अनुसार अगर कोई मरीज जेनेटिक टेस्ट कराता है तो 2300 रुपये खर्च आता है। लेकिन अगर ये टेस्ट प्राइवेट लैब में कराए जाएं तो इसका खर्च दस से 15 हजार रुपये आता है। इसके अलावा समय भी काफी ज्यादा लगता है। इससे मरीज को काफी परेशानी होती है।
पीजीआई की लैब में एसएमए, इटेक्शिया, मेंटल रिटारडेशन, हेरिडेट्री माइग्रेन, एपिलेप्सी, उम्र के साथ होने वाले मॉलीक्यूलर डी-जेनरेशन, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, अल्जाइमर, पार्किंसन, रेटेनिटिस और पिगमेंटोसा जैसे जेनेटिक न्यूरो डिसऑर्डर के टेस्ट संभव हैं।