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ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स रैंकिंग : तीन साल में 'सिटी ब्यूटीफुल' टॉप फाइव से हुआ बाहर, कई कारणों से गिर गई रैंकिंग

Fri, 05 Mar 2021 02:34 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ - फोटो : फाइल फोटो
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योजनाओं के प्रति प्रशासन और नगर निगम की उदासीनता का असर अब चंडीगढ़ की साख पर पड़ने लगा है। केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी ईज ऑफ लिविंग (जीवन जीने की सुगमता) इंडेक्स रैंकिंग में चंडीगढ़ टॉप फाइव से खिसककर 29वें पायदान पर पहुंच गया है। 
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दस लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों की सूची में बंगलुरू पहले स्थान पर, पुणे दूसरे स्थान पर जबकि अहमदाबाद तीसरे स्थान पर है। वहीं, दस लाख व उससे कम आबादी वाले शहरों में शिमला टॉप पर है। ईज ऑफ लिविंग शहरों की रैंकिंग शहर में जीवन की गुणवत्ता, आर्थिक क्षमता व स्थिरता सहित कई मानकों पर परखा जाता है।


साथ ही इसमें प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई योजनाओं पर शहरवासियों के फीडबैक भी अहम माने जाते हैं। चंडीगढ़ की साख पर बट्टा लगने के बाद शहर में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। विपक्ष ने इसका पूरा ठीकरा सत्ताधारी पार्टी व अफसरों पर फोड़ा है। उनका कहना है कि जब से शहर की सत्ता भाजपा के हाथों में गई है, तब से शहर पिछड़ गया है।
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नगर निगम का प्रदर्शन भी निराशाजनक, देश में 23वां स्थान
आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय की ओर से इस बार नगर निगम के प्रदर्शन की रैंकिंग की भी जारी की गई है। इसमें भी शहर का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। चंडीगढ़ नगर निगम देशभर में 23वें स्थान पर रहा है। 100 में से नगर निगम को केवल 47.71 अंक मिले हैं। वहीं लोगों की ओर से निगम की सेवाओं को 60.39 अंक दिए गए हैं। इस सूची में इंदौर नगर निगम अव्वल रहा है। मंत्रालय की ओर से इसका आकलान नगर निगम की योजनाएं, वित्त, पॉलिसी, टेक्नोलॉजी और गवर्नेंस के आधार पर की जाती हैं।

बेहतर जीवन वाले शहरों में 20वां स्थान
रहने योग्य शहरों की सूची में चंडीगढ़ को 100 में से 54.40 अंक मिले हैं। वहीं, बेहतर जीवन जीने के लिए 54.42 अंक मिले हैं। इसमें शहर को 20वां स्थान मिला है। शहर की आर्थिक क्षमता के लिए 9.90 अंक मिले हैं। इसमें शहर को 34वां स्थान मिला है। वहीं अर्थव्यवस्था में निरंतरता के लिए 60.13 नंबर मिले हैं। इसमें शहर को 12वां स्थान मिला है।
 

योजना तैयार करने में कमजोर, वित्त व्यवस्था भी लचर
शहर के पिछड़ने में सबसे बड़ी वजह योजनाओं का धरातल पर नहीं उतरना रहा है। सर्वे में शहरवासियों ने माना है कि सरकार की योजनाएं शहर में लागू नहीं हो पाती हैं। इस श्रेणी में चंडीगढ़ को 43वीं रैंक मिली है। वित्त व्यवस्था में शहर को 37वीं रैंक, सुविधा देने में निगम 15वें, तकनीक में 14वीं और शासन प्रणाली में निगम 13वें स्थान पर है।

शिमला से लेना होगा सबक
चंडीगढ़ से सटे हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से चंडीगढ़ को काफी कुछ सीखने की जरूरत है। वर्ष 2018 में शिमला पूरे देश में रहने योग्य शहरों की सूची में 92वें स्थान पर था। वहां अधिकारियों और राजनीतिक दलों ने मिलकर काम किया और शिमला को पहले नंबर पर लाकर खड़ा कर दिया। 10 लाख से कम की आबादी वाले शहरों की सूची में शिमला नंबर एक पर है।
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इन मानकों के आधार पर तैयार होती है सूची
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के साथ ही ईज ऑफ  लिविंग को भी बेहतर करने पर जोर दिया है इसलिए इस सूची को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। सरकार शहरी विकास पर खर्च का निर्धारण भी इसी सूची को प्राथमिकता में रखते हुए करती है। ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स पहली बार 2018 में जारी किया गया था। यह सूची सरकार, पहचान और संस्कृति, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, किफायती आवास, भूमि योजना, पार्क, परिवहन, जल आपूर्ति, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण की गुणवत्ता जैसे 15 मानकों के आधार पर तैयार की जाती है।

ये योजनाएं समय पर नहीं उतरीं धरातल पर
  1. डंपिंग ग्राउंड का अब तक ठोस समाधान नहीं निकला है
  2. साइकिल शेयरिंग प्रोजेक्ट को शुरू होने में वर्षों लग गए
  3. लोगों की शिकायतों पर सुनवाई न होने की समस्या बनी हुई है
  4. आवास देने और पूरी व्यवस्था उपलब्ध कराने में प्रशासन असफल रहा
  5. राजस्व के मोर्चे पर भी चंडीगढ़ असफल रहा 
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