भाजपा के 21 नेताओं से संबंधित मामले में जिला अदालत ने केस को खत्म करने की याचिका को खारिज कर दिया। पुलिस ने अदालत में केस को खत्म करने की याचिका दायर की थी। इससे पहले भी निचली अदालत ने पुलिस की याचिका को खारिज कर दिया था। अब पुलिस हाईकोर्ट में भी इसे चैलेंज कर सकती है।
दरअसल, 10 साल पहले कश्मीरी नेता मीरवाइज उमर फारूख के कार्यक्रम में तोड़फोड़ और मारपीट करने के मामले में भाजपा के 21 नेताओं पर केस दर्ज किया गया था। इन नेताओं में मौजूदा पार्षद सुनीता धवन, पूर्व मेयर आशा जसवाल, चेतन संधू, संजीव कुमार, सत्यवान, अरविंद राणा, संजय कौल, अमित राणा, हेमंत, सोनांशु, दिनेश चौहान, संजीव वर्मा, विजय सिंह, सुनील कांसल, परवेश शर्मा, उषा शर्मा, देवश्री, मीना शर्मा, पूर्व पार्षद सतिंदर सिंह और राजिंदर कौर रतू समेत अन्य नेता शामिल हैं। सभी पर आईपीसी की धारा 147, 149, 323 और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम हो चुके हैं। 25 नवंबर 2010 को हुर्रियत कांफ्रेंस के नेता मीरवाइज उमर फारूक सेक्टर-35 स्थित किसान भवन में एक सेमिनार में पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान जब मीरवाइज बोलने लगे तो कुछ लोगों ने ऐतराज जताया। मामला इस कदर बिगड़ा कि भीड़ में से एक शख्स ने निकलकर उन पर हमला कर दिया। साथ ही मौके पर मौजूदा भाजपा नेताओं ने वहां रोष प्रदर्शन कर नारेबाजी शुरू कर दी। आरोप था कि विरोध कर रहे लोगों ने कार्यक्रम में तोड़फोड़ और पथराव किया। शिकायत पर सेक्टर- 36 थाना पुलिस ने तोड़फोड़ और कार्यक्रम को बाधित करने के आरोप 22 लोगों को गिरफ्तार किया था।