चंडीगढ़ की सड़कों की उम्र बढ़ाने के लिए नगर निगम ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर (एनआईटीटीटीआर) से मेयर राजेश कालिया की उपस्थिति में अनुबंध कर लिया। इस एमओएयू के साइन होने के बाद अब एनआईटीटीटीआर की टीम शहर की सड़कों का सर्वे करेगी। उसके बाद कहां कहां किस तरह के मैटेरियल से सड़कों का निर्माण होना होना इसकी पूरी जानकारी निगम को मिल सके। साथ इससे निगम के पास अपनी सड़कों का नया डाटा भी उपलब्ध हो जाएगा।
सितंबर माह की बैठक में सेक्टर 26 स्थित एनआईटीटीटीआर से कॉन्ट्रेक्ट करने के लिए एजेंडा लाया गया था। फंड की कमी के बावजूद शहर की सड़कों को मजबूती देने के उद्देश्य से पार्षदों ने प्रोजेक्ट को हरी झंडी भी दे दी थी। अनुबंध केअनुसार एनआईटीटीटीआर की टीम सड़कों का सर्वे करेगी।
एक रिपोर्ट तैयार करके निगम को बताया जाएगा कि कहां किस तरह की सड़क बनना चाहिए, कहां पैचवर्क होना है, कहां किस सड़क पर कैसा मैटेरियल उपयोग करना है साथ ही किस तरह की सड़क बनाना है। कमिश्नर केके यादव ने बताया कि निगम के पास कोई रिकॉर्ड नहीं कि कहां कौन सी सड़क और कब बनाई गई थी, शहर का क्या मॉडल थाआदि। इसके लिए एनआईटीटीटीआर की मदद लेना जरूरी है।
इसके लिए एनआईटीटीटीआर ने निगम से 30 सालों के लिए 63.06 लाख रुपए का बजट मांगा था लेकिन नगर निगम ने मात्र 36.60 लाख रुपए तक ही देने की बात कही थी। उसके बाद संस्थान ने इस पर सहमति जता दी थी। इस मौके पर चीफ इंजीनियर शैलेंद्र सिंह, एसई बीएंडआर
संजय अरोड़ा, एनआईटीटीटीआर के निदेशक डॉ. एसएस पटनाईक आदि मौजूद रहे।