नगर निगम चुनावों में मिले भाजपा को भारी बहुमत से कांग्रेस सकते है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल और कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा को अपनी पार्टी के भीतर ही पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी के गुट से पंगा लेना महंगा पड़ा।
मनीष तिवारी गुट के एक भी नेता को टिकट नहीं दी गई जिसका खामियाजा भी कांग्रेस को भुगतना पड़ा। पूर्व पार्षद चंद्रमुखी शर्मा के भाई सूरजमुखी शर्मा ने वार्ड नंबर-1 से निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ा जिसका खामियाजा यह हुआ कि इस सीट से कांग्रेस उम्मीदवार एचएस लक्की चुनाव हार गए। सूरजमुखी शर्मा को करीब एक हजार वोट मिले है यह वोट कांग्रेस के ही थे जो अगर अगर शर्मा न खड़े होते तो इसका फायदा कांग्रेस को मिलता। तिवारी गुट कांग्रेस की हार का ठिकरा पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल पर फोड़ा है।
कांग्रेस को नोटबंदी के मुद्दे से काफी आस थी लेकिन इसका कोई फायदा पार्टी को नहीं मिला। कांग्रेस की बुरी तरह से हार का कारण सगठन के कमजोर होने को बताया जा रहा है।