कूड़ा लेने जो आते हैं उनका व्यवहार ठीक नहीं होता
मनीमाजरा के व्यापारी और महाराजा अग्रसेन सेवा संगठन के चेयरमैन सतबीर गर्ग ने नगर निगम के काम को गलत बताया है। उनका कहना है कि मनीमाजरा में कूड़ा उठाने का सिस्टम बहुत कमजोर है। यहां आबादी के हिसाब से गाड़ियां तक नहीं हैं। कई जगह यह नियमित जाते भी नहीं हैं। ऑल मनीमाजरा वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान एसएस परवाना का कहना है कि इलाके की छोटी गलियों में अभी नगर निगम की टीम ठीक से काम नहीं करती है। पहले की तुलना में सुधार हुआ है लेकिन बहुत काम बाकी है। ऐसे में पहले 100 फीसदी सुधार के बाद ही चालान या जुर्माना लगाना चाहिए।
पीड़ित बोले — पत्नी ने दो दिन से खाना नहीं खाया
जिन दो लोगों के यहां ढोल बजाया गया, उनमें एक जितेंद्र सक्सेना का कहना है कि टीम नियमित आती नहीं है। हम मकान मालिक को किराया देते हैं, कूड़ा उठाने वाला कहता है कि पैसे अलग से लगेंगे। अब कूड़ा अगर लेगा नहीं तो हम घर में उसको कैसे रख सकते हैं। वहीं, दूसरे व्यक्ति मोहम्मद वारिस का कहना है कि इस घटना के बाद उनकी पत्नी ने दो दिन से खाना तक नहीं खाया है। वह अभी शहर में आई है। ऐसी घटना होने से वह डर गई है। तीन दिन से कूड़ा वाला आया नहीं तो यहां डालना पड़ा। उस स्थान पर कई लोग अक्सर कूड़ा डालते हैं। नगर निगम को पहले हमें समझाना चाहिए था। उसके बाद भी हम गलती करें तो कार्रवाई करनी चाहिए थी।
मानहानि का मुकदमा भी हो सकता है
चंडीगढ़ के पूर्व सांसद और वरिष्ठ वकील सत्यपाल जैन का कहना है कि यह तरीका गलत है। कानून तोड़ने पर सजा का प्रावधान है लेकिन किसी को जलील नहीं किया जा सकता है। नगर निगम को अपने इस फैसले पर फिर से विचार करना चाहिए। उन्होंने बताया कि कानूनी तौर पर यह करना गलत है और इसमें मानहानि का मुकदमा भी पीड़ित की तरफ से किया जा सकता है।
डंपिंग जोन में ढोल बजाना चाहिए
चंडीगढ़ व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजीव चड्ढा का कहना है कि कई बाजारों में नियमित कूड़ा उठाने वाले नहीं आते हैं। कारोबारी अपने स्तर पर कूड़ा एकत्र कर गाड़ी वालों को देते हैं। यहां तक कि बाजार में रखे डस्टबिन भर जाता है तो उसका कूड़ा वैसे ही पड़ा रहता है। यह तरीका ठीक नहीं है। नगर निगम को चाहिए कि डंपिंग जोन में ढोल बजवाए, जहां काम समय से पूरा नहीं हो पाता है।
इंदौर और बेंगलुरु में ऐसी पहल करने की दलील
इस बारे में चंडीगढ़ की मेयर हरप्रीत कौर बबला का कहना है कि नगर आयुक्त से बात हुई है। इंदौर और बेंगलुरु में वहां की नगर निगम ने यह पहल की है। कूड़े के प्रति लोगों को सतर्क करने के लिए ऐसा किया गया है। शहर की बेहतरी के लिए यह फैसला लिया गया है, हालांकि अगर ज्यादा परेशानी हुई तो इस फैसले पर विचार कर इसे बंद किया जा सकता है लेकिन अभी यह फैसला बेहतरी के लिए लिया गया है।
चंडीगढ़ कूड़ा निस्तारण में लगातार पीछे रहा है
स्वच्छता सर्वे में चंडीगढ़ कूड़ा निस्तारण में लगातार पीछे रहता है। इस बार डोर-टू-डोर कूड़ा निस्तारण में सबसे कम नंबर आया था। 100 में महज 63 नंबर ही मिल पाए थे। पिछले पांच साल की रिपोर्ट देखें तो बस एक साल को छोड़ दिया जाए तो कभी भी नगर निगम को इसमें अच्छे नंबर नहीं मिले हैं।
साल 2020 में 700 में 404 नंबर,
साल 2021 में 1800 में 900 नंबर,
साल 2022 में 2100 में 1838 नंबर चंडीगढ़ को मिला था।
साल 2016 में 100 फीसदी काम पूरा कर चुका है इंदौर
इंदौर शहर की आबादी लगभग 35 लाख है। यहां से प्रतिदिन 1900 टन कचरा निकलता है। शहर में रोजाना 1200 टन सूखा कचरा और 700 टन गीला कचरा निकलता है। इंदौर नगर निगम ने 2015 में दो वार्डों में पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर डोर-टू-डोर कचरा संग्रह करना शुरू किया था। 2016 के अंत तक नगर निगम ने डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के शत-प्रतिशत आंकड़े को छू लिया था। जबकि यहां की नंबरिंग हर साल इस व्यवस्था में फेल होने से कटती है।
यह भी जानें
नवंबर 2022 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देशों का पालन न करने पर चंडीगढ़ की प्रदूषण कंट्रोल कमेटी ने नगर निगम को फटकार लगाई थी। इसके साथ ही निगम पर 9.30 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। इसमें 3 करोड़ रुपये का जुर्माना कचरे का प्रोसेसिंग न करने पर लगाया गया था और उसके बाद 70 लाख का जुर्माना डंपिंग ग्राउंड की साइट पर बायो-रिमेडिएट ओल्ड वेस्ट में असफल रहने और कचरा प्रबंधन की खामियों के लिए लगाया गया था। बाकी 5 करोड़ 60 लाख का जुर्माना दूसरे कारणों में लगाया गया था।