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चंडीगढ़: मानसून सक्रिय होते ही आई आफत, लगातार बरसात से घरों में घुसा पानी, सुखना में पानी खतरे के निशान से तीन फुट दूर 

Thu, 29 Jul 2021 09:46 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

मौसम विभाग की ओर से बताया गया है कि अगले तीन दिन अधिकतम तापमान 28 से 29 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25 से 26 डिग्री दर्ज किए जाने की संभावना है। बारिश के बावजूद अब भी चंडीगढ़ में करीब 37 फीसदी की कमी है।
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सुखना लेक का जलस्तर बढ़ा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आखिरकार बादलों की आवाजाही के बीच मंगलवार रात चंडीगढ़ में मानसून सक्रिय हो गया। रात में शुरू हुई बारिश बुधवार सुबह 11 बजे तक जारी रही। कई इलाकों में भारी बारिश दर्ज की गई। इससे घरों में पानी भर गया। सड़कें लबालब हो गईं। लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ा। रात और सुबह की बरसात मिलाकर करीब 30 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज की गई, जबकि एयरपोर्ट इलाके में 42.4 एमएम बारिश हुई। बारिश से तापमान में छह डिग्री की गिरावट दर्ज हुई। वहीं बारिश की वजह से सुखना लेक में जलस्तर बढ़ गया है। पानी खतरे के निशान से तीन फुट दूर है। एहतियात के तौर पर प्रशासन ने सुखना लेक पर अधिकारियों की तैनाती कर दी है। इसके साथ ही पंजाब के साथ लगते एरिया के अधिकारियों को भी अलर्ट जारी कर दिया है।

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बुधवार को तापमान 26.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से छह डिग्री कम रहा। जबकि रात का तापमान 25.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ, जो सामान्य से दो डिग्री ज्यादा रहा। दिन व रात के तापमान में मात्र एक डिग्री का अंतर दिखा। हालांकि, बारिश के बावजूद उमस में कोई खास फर्क नहीं पड़ा। हवा में नमी का अधिकतम स्तर 93 फीसदी रिकॉर्ड हुआ।


मौसम विभाग की ओर से बताया गया है कि गुरुवार को भी बारिश के आसार बने हैं। बादल छाए रहेंगे। अगले तीन दिन अधिकतम तापमान 28 से 29 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25 से 26 डिग्री दर्ज किए जाने की संभावना है। बारिश के बावजूद अब भी चंडीगढ़ में करीब 37 फीसदी की कमी है। अब चंडीगढ़ में करीब 385 एमएम बारिश हो जानी चाहिए थी, लेकिन अब तक 241 एमएम बारिश हुई है।
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सुखना के बढ़े जलस्तर पर पंजाब को अलर्ट जारी

बरसात से जमा पानी के कारण गिरा व्यक्ति। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बुधवार को सुखना का जलस्तर 1160.10 फुट दर्ज किया गया। लगातार बारिश के बाद लेक का जलस्तर साढ़े तीन फुट से ऊपर बढ़ा है। दो दिन पहले तक जलस्तर 1156.60 फुट था, इसलिए एक दिन बाद इसमें काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 1163 फुट पर पहुंचने के बाद सुखना के फ्लड गेट खोलने की नौबत आती है। 

यूटी प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि सुखना लेक के बढ़ते जलस्तर के चलते लेक पर विभाग के कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है। तीन शिफ्टों में एसडीओ भी तैनात किए गए हैं। बारिश होने के दौरान हर एक घंटे में सुखना के जलस्तर को नोट करने के साथ विभाग को सूचित किया जाएगा। चीफ इंजीनियर सीबी ओझा ने बताया कि पंजाब को इसे लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया है। 

सुखना चो की पहले ही विभाग की तरफ से सफाई करवा दी गई थी। पंजाब को उनके इलाके में आने वाले सुखना चो की सफाई के लिए पत्र लिखा गया था। अगर आगे और बारिश हुई और सुखना लेक का जलस्तर 1163 फुट पर पहुंचता है तो फ्लड गेट खोलने पड़ेंगे। ये अगले कुछ दिनों में होने वाली बारिश पर ही निर्भर करेगा। हालांकि, विभाग ने गेट खोलने वाले कर्मियों की नियुक्ति भी कर दी है। विभागीय अधिकारियों ने झील के बढ़ते जलस्तर को लेकर कर्मचारियों को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।
 
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टांगरी नदी में बाढ़.. कार बही, चालक सुरक्षित 

टांगरी नदी के पुल पर भरा पानी। - फोटो : अमर उजाला
बरवाला में हुई भारी बरसात के चलते टांगरी नदी में आई बाढ़ की चपेट में एक कार आ गई। इस दौरान कार चालक सुरक्षित बाहर निकल आया और कार पानी में बह गई। पुलिस ने बताया कि मौली वासी तरुण अपनी नैनो कार में बतौड़ गांव से मौली जाने वाले टांगरी नदी के रास्ते से घर मौली जा रहा था। जैसे ही वह नदी पर बनाए गए वैकल्पिक रास्ते से गुजरा था तो अचानक उसकी कार खराब हो गई। इतने में अचानक से नदी में बाढ़ आ गई और बाढ़ ने कार को चपेट में ले लिया, लेकिन तरुण कार को छोड़कर सुरक्षित बाहर आ गया और कार बह गई।

बरसात से नाला उफान पर.. मौली गांव के घरों में घुसा पानी 
मंगलवार रात हुई जोरदार बारिश के बाद मौलीगांव के बीचोंबीच बने बरसाती नाले का पानी ओवर फ्लो होकर घरों में घुस गया। इसके अलावा नाले की सारी गंदगी और कीचड़ यहां बने पुल के अलावा गांव की सड़कों पर आकर जमा हो गई।  

गांव निवासी सुरेंद्र ठाकुर ने बताया कि बुधवार शाम तक लोगों को निकल पाना मुश्किल हो गया था। हालांकि हालात अब भी वैसे ही हैं, क्योंकि नगर निगम और प्रशासन द्वारा अभी की गंदगी और कीचड़ को उठाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। वहीं, गांव के पूर्व सरपंच ठाकुर करतार सिंह ने कहा कि गांव के बीचोंबीच बने इस बरसाती नाले का पक्का नहीं किया जा रहा है। नाले दोनों तरफ से कच्चा होने के बाद ऊपर से भी खुला पड़ा है जबकि यही नाला मनीमाजरा के क्षेत्र में दोनों से तरफ और ऊपर से कवर किया हुआ है। जिस कारण वहां लोग बरसाती पानी के चपेट से बच जाते हैं।  
 
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