नगर निगम के एक हजार रेगुलर कर्मचारियों में से 400 ही प्रतिदिन काम करते है जबकि बाकी काम नहीं करते हैं। इसी तरह 1200 अस्थायी कर्मचारियों में से दर्जनों गैरहाजिर रहते हैं। यह बात शुक्रवार को मेयर आशा जसवाल द्वारा बुलाई गई बैठक में सामने आई है। बैठक में पार्षद और अधिकारी मौजूद रहे। इसके बाद निर्णय लिया गया कि अब हर कर्मचारी को काम करना होगा चाहे वह कर्मचारी यूनियन का पदाधिकारी हो या कोई भी सफाई कर्मचारी नेता। नो पे नो वर्क की नीति लागू की जाएगी।
बैठक में सैनिटेशन इंस्पेक्टरों ने यह भी कहा कि कर्मचारी नेता कई बार उनकी बात न मानने पर उनके साथ दुर्व्यवहार भी करते हैं। यह भी बात सामने आई कि कर्मचारी नेता अपने अनुसार ट्रांसफर करने का भी दबाव एमओएच डा. भट्टी पर डालते हैं। इस पर यह निर्णय लिया गया कि ट्रांसफर की पावर अब अतिरिक्त कमिश्नर आईएएस सौरभ मिश्रा को दी जाए। इस समय एक से लेकर 30 सेक्टर तक सफाई का काम नगर निगम के अंतर्गत है जबकि दक्षिणी सेक्टर की सफाई का काम मेकेनिकल स्वीपिंग कंपनी को दिया गया है। एक से 30 सेक्टर में कुल 2200 कर्मचारी काम करते हैं जिनमें एक हजार रेगुलर कर्मचारी है।
अधिकारियों के घरों से निकाले जाए कर्मचारी
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया है कि जो भी सफाई कर्मचारी नगर निगम और प्रशासन के अधिकारियों और पूर्व अधिकारियों के घर पर लगे हुए हैं उन्हें भी उनके घरों से बाहर निकाल कर सड़कों पर काम लगाया जाए। मेयर ने ऐसे अधिकारियों की सूची भी मांगी है।