नए साल में होने वाला मेयर चुनाव भाजपा के वर्तमान नेतृत्व में ही होगा, जबकि यह संभावना थी कि मेयर चुनाव से पहले भाजपा अध्यक्ष को बदल दिया जाएगा। लेकिन पार्टी हाईकमान ने नेताओं की गुटबाजी के कारण अध्यक्ष चुनाव से पहले मेयर का चुनाव करवाने का निर्णय लिया है।
भाजपा को उम्मीद है कि इस बार मेयर की कुर्सी पर 15 साल बाद उनका कब्जा होगा। इसलिए सांसद किरण खेर भी शहर लौट आई हैं। वह भी चाहती हैं कि उनके सांसद रहते हुए मेयर की कुर्सी पर भाजपा का कब्जा हो जाए।
दावेदारों में मची खलबली
मेयर चुनाव नजदीक आने के साथ ही भाजपा के दावेदारों में खलबली मच गई है। जबकि विरोधी गुट चाहता है कि टंडन गुट से किसी को मेयर पद का उम्मीदवार न बनाया जाए। विरोधी गुट के पार्षदों ने इसके लिए सांसद से अलग से मिलने का समय भी मांगा है। भाजपा में इस समय अरुण सूद, देवेश मोदगिल, सौरभ जोशी, सीनियर डिप्टी मेयर राजेश गुप्ता और देसराज गुप्ता मेयर पद के दावेदार हैं।
इन दावेदारों ने लाबिंग तेज कर दी है। जबकि पार्टी मेयर पद का उम्मीदवार दो जनवरी को तय करेगी। उस दिन पार्टी प्रभारी प्रभात झा उम्मीदवारों की घोषणा करने के लिए आ रहे हैं।
जबकि कांग्रेस भाजपा से पहले 30 दिसंबर को मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के उम्मीदवारों की घोषणा करने जा रही है। कांग्रेस में मेयर पद के लिए सिर्फ मुकेश बस्सी ही दावेदार हैं। आठ जनवरी को चुनाव होना है जबकि नामांकन की तारीख चार जनवरी रखी गई है।
कांग्रेस को तीन वोट क्रॉस होने की उम्मीद
कांग्रेस का मानना है कि भाजपा के नेताओं और पार्षदों की गुटबाजी के कारण हुई क्रॉस वोटिंग का उन्हें फायदा मिलेगा। पार्टी का मानना है कि भाजपा की तीन वोट क्रॉस होगी और मेयर की कुर्सी पर मनोनीत व बसपा के दम पर कब्जा कर लेंगे।
जबकि भाजपा हाईकमान के नेताओं के हस्तक्षेप से क्रॉस वोटिंग रोकने के लिए रणनीति बना रही है। हाईकमान की ओर से जल्द ही स्पष्ट कर दिया जाएगा कि जिस किसी ने क्रॉस वोटिंग की, उन्हें अगले साल दिसंबर में होने वाले चुनाव में टिकट नहीं दी जाएगी।