मेयर चुनाव को लेकर शहर में राजनीति का माहौल फिर गरमा गया है। भाजपा की तरह ही कांग्रेसी खेमे में भी उम्मीदवार बनने की दौड़ तेज हो गई। इस बार मेयर पद महिला के लिए आरक्षित है। ऐसे में कांग्रेस की दो महिला पार्षदों गुरबख्श रावत और पूनम शर्मा में जबरदस्त टक्कर दिख रही है। दोनों ही पार्षदों ने अपने-अपने ढंग से अपने नंबर बनाने शुरू कर दिए हैं।
पूनम शर्मा:
पेशे से एडवोकेट हैं। बीएएलएलबी की पढ़ाई की है। पहली बार पार्षद चुनी गई थीं। कांग्रेस पार्टी के कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुकी हैं। पार्षद के अलावा कांग्रेस की शहरी जिला अध्यक्ष के पद पर काबिज हैं। पूनम शर्मा का कहना है कि मैंने पार्टी से आज तक कुछ नहीं मांगा है। मेयर चुनाव की जहां तक बात है, पार्टी जो भी फैसला करेगी, मुझे मंजूर होगा।
गुरबख्श रावत:
युवा महिला पार्षद हैं। ये भी पहली बार पार्षद चुनी गईं। पेशे से आईटी प्रोफेशनल हैं। मास्टर इन कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की है। पार्टी के सोशल मीडिया सेल की इंचार्ज भी हैं। नगर निगम में आर्ट एंड कल्चर एंड स्पोर्ट्स कमेटी में पिछले तीन सालों से चेयरपर्सन हैं।
गुरबख्श रावत का कहना है कि मेयर चुनाव को लेकर भाजपा पार्षद ज्यादा उत्साहित हैं, लेकिन इस साल भी मेयर सीट कांग्रेस की ही होगी। बाकी, टिकट को लेकर पार्टी जो भी फैसला करेगी, वो सही होगा।
सात साल से कांग्रेसियों का कब्जा
नगर निगम में मेयर की कुर्सी पिछले सात साल से कांग्रेसियों के कब्जे में ही रही है। आखिरी बार 2007 में अकाली दल की हरजिंदर कौर मेयर बनी थीं। उनके बाद 2008 में प्रदीप छाबड़ा, 2009 में कमलेश, 2010 में अनु चतरथ, 2011 में रविंदर पाल पाली, 2012 में राजबाला मलिक, 2013 में सुभाष चावला और 2014 में हरफूलचंद्र कल्याण मेयर रहे हैं। हालांकि, इस बार ये सिलसिला टूटने के कयास लग रहे हैं।
कांग्रेस की राह मुश्किल
इस बार कांग्रेस के लिए मेयर बनाने की राह मुश्किल है। कांग्रेस के पास नौ ही पार्षद हैं, जबकि भाजपा-अकाली दल के पास सांसद को मिलाकर 14 वोट हैं। दो वोट बसपा, एक वोट निर्दलीय और नौ वोट मनोनीत पार्षदों के हैं। ऐसे में कांग्रेस की नजर बसपा और मनोनीत पार्षदों पर टिकी है।