जुलाई 2020 में पता चला कि उनका पानी का बिल एक लाख 52 हजार 956 रुपये आया है। हीरा लाल को लगा कि गलती से नगर निगम ने उन्हें डेढ़ लाख का बिल भेज दिया है और विभाग अगले बिल में गलती सुधार लेगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
नगर निगम ने सितंबर 2020 के महीने में दो लाख 13 हजार 332 रुपये का बिल भेज दिया, जिसे देख वह परेशान हो गए। उन्होंने स्थानीय नेताओं को इसकी जानकारी दी लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ।
फरवरी 2021 में वह संपर्क केंद्र पर गए ताकि सही बिल की जानकारी मिल सके लेकिन वहां पर कर्मचारियों ने कहा कि उनका कुल बिल अब पांच लाख 51 हजार 214 रुपये हो गया है।
हीरा लाल ने बताया कि उनके घर पर नगर निगम ने पानी का मीटर लगा रखा है। फिर भी हर बार उन्हें औसत बिल भेज दिया जाता है। औसत बिल भेजने के लिए नगर निगम के कर्मचारी किस तरह गणना करते हैं, यह समझ से परे है क्योंकि उनके बिल में इस्तेमाल किए पानी की रीडिंग 5000 किलोलीटर बताया जात रहा है, जो बहुत ज्यादा है।
हीरा लाल ने कहा कि वह घर में अकेले रहते हैं। एक दिन में ज्यादा से ज्यादा पांच बाल्टी पानी का ही इस्तेमाल करते हैं फिर रीडिंग 5000 किलोलीटर कैसे हो सकती है। इतने पानी का इस्तेमाल को पूरी कालोनी भी नहीं करती होगी फिर कर्मचारियों को यह बात समझ क्यों नहीं आती है। अब हीरा लाल पिछले कई दिनों से सेक्टर-37 स्थित शिकायत केंद्र के चक्कर काट रहे हैं।
मीटर रीडिंग के हिसाब से ही पानी के बिल जारी किए जा रहे हैं। किसी बिल में कोई ज्यादा खपत डाली गई है तो इसकी जांच कराई जाएगी। कई बार मीटर खराब होने अथवा तकनीकी कारणों से बिल पर गलत प्रिंट हो जाता है। इस संबंध में जांच करा कर सही बिल जारी कर दिया जाएगा। -शैलेंद्र सिंह, चीफ इंजीनियर, नगर निगम।