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चंडीगढ़ : दो कमरे के मकान में अकेला रह रहा व्यक्ति, साढ़े पांच लाख आया पानी का बिल तो रह गया हैरान

Sun, 07 Mar 2021 03:27 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पानी का बिल दिखाते हीरा लाल। - फोटो : अमर उजाला
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मलोया में दो कमरे के एक मकान का पानी का बिल करीब साढ़े पांच लाख रुपये आया है। यह बिल जनवरी 2020 से फरवरी 2021 तक का है। इस घर में हीरा लाल अकेले रहते हैं। 

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बिल देखने के बाद से उनके होश उड़े हुए हैं। अब वह विभाग के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सेक्टर-37 स्थित शिकायत केंद्र में उनके बिल की मूल प्रति भी रख ली गई है।

हीरा लाल ने बताया कि वह बिजली का काम करते हैं और मलोया के स्मॉल फ्लैट में अकेले रहते हैं। जनवरी 2020 से ही उनका पानी का बिल गलत आ रहा है। उन्होंने इसकी शिकायत भी की थी। इस बीच लॉकडाउन लग गया और वह अपने परिवार के पास गांव चले गए।

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जुलाई 2020 में पता चला कि उनका पानी का बिल एक लाख 52 हजार 956 रुपये आया है। हीरा लाल को लगा कि गलती से नगर निगम ने उन्हें डेढ़ लाख का बिल भेज दिया है और विभाग अगले बिल में गलती सुधार लेगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

नगर निगम ने सितंबर 2020 के महीने में दो लाख 13 हजार 332 रुपये का बिल भेज दिया, जिसे देख वह परेशान हो गए। उन्होंने स्थानीय नेताओं को इसकी जानकारी दी लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ।

फरवरी 2021 में वह संपर्क केंद्र पर गए ताकि सही बिल की जानकारी मिल सके लेकिन वहां पर कर्मचारियों ने कहा कि उनका कुल बिल अब पांच लाख 51 हजार 214 रुपये हो गया है।
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मीटर लगा लेकिन औसत पर बिल, रीडिंग 5000 किलोलीटर

हीरा लाल ने बताया कि उनके घर पर नगर निगम ने पानी का मीटर लगा रखा है। फिर भी हर बार उन्हें औसत बिल भेज दिया जाता है। औसत बिल भेजने के लिए नगर निगम के कर्मचारी किस तरह गणना करते हैं, यह समझ से परे है क्योंकि उनके बिल में इस्तेमाल किए पानी की रीडिंग 5000 किलोलीटर बताया जात रहा है, जो बहुत ज्यादा है।
 
हीरा लाल ने कहा कि वह घर में अकेले रहते हैं। एक दिन में ज्यादा से ज्यादा पांच बाल्टी पानी का ही इस्तेमाल करते हैं फिर रीडिंग 5000 किलोलीटर कैसे हो सकती है। इतने पानी का इस्तेमाल को पूरी कालोनी भी नहीं करती होगी फिर कर्मचारियों को यह बात समझ क्यों नहीं आती है। अब हीरा लाल पिछले कई दिनों से सेक्टर-37 स्थित शिकायत केंद्र के चक्कर काट रहे हैं।
मीटर रीडिंग के हिसाब से ही पानी के बिल जारी किए जा रहे हैं। किसी बिल में कोई ज्यादा खपत डाली गई है तो इसकी जांच कराई जाएगी। कई बार मीटर खराब होने अथवा तकनीकी कारणों से बिल पर गलत प्रिंट हो जाता है। इस संबंध में जांच करा कर सही बिल जारी कर दिया जाएगा। -शैलेंद्र सिंह, चीफ इंजीनियर, नगर निगम।
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