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चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड की नई गवर्निंग बॉडी का गठन किया गया, जानिए कौन-कौन बना सदस्य

Sat, 22 Sep 2018 10:45 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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CHB Draw - फोटो : amar ujala
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सीएचबी की नई गवर्निंग बाडी का गठन हो गया है। इसमें भाजपा के उपाध्यक्ष रघुवीर अरोड़ा का नाम काट दिया गया है जबकि उन्हें पिछले कार्यकाल में सदस्य बनाया गया था। अरोड़ा की जगह सुबीना बंसल को सदस्य बनाया है। माना जा रहा है कि संघ की सिफारिश पर सुबीना का नाम तय हुआ है। सुबीना बंसल भाजपा महिला मोर्चा की महासचिव भी रह चुकी हैं। जबकि उनकी बेटी शिप्रा बंसल इस समय नगर निगम की मनोनीत पार्षद भी हैं।
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गवर्निंग बाडी में तीन गैर सरकारी और 5 सरकारी सदस्य बनाए गए हैं। सदस्यों की अधिसूचना शुक्रवार को हुई है। तीन में से बाकी बचे दो सदस्यों में प्रेम कौशिक और तरसेम गर्ग का नाम शामिल है। यह दोनों पिछली गवर्निंग बाडी में भी सदस्य थे। इन दोनों के अलावा अरोड़ा को फिर से सदस्य बनाने का प्रस्ताव हाउसिंग बोर्ड की ओर से गवर्नर हाउस भेजा गया था लेकिन वहां अरोड़ा का नाम काटकर सुबीना बंसल को जगह दी गई है। अरोड़ा पार्टी के वरिष्ठ नेता और भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन के करीबी हैं।

नवनियुक्त सदस्य सुबीना बंसल और प्रेम कौशिक सेक्टर-38 के निवासी हैं जबकि तरसेम गर्ग पंचकूला सेक्टर-4 में रहते हैं। प्रेम कौशिक भाजपा प्रदेश महासचिव भी हैं और तरसेम गर्ग भी पार्टी के नेता हैं। इन सभी की नियुक्ति तीन साल के लिए की गई है। पिछले कार्यकाल से ही पहली बार ऐसा हुआ है जब राजनीतिक दलों के नेताओं को इस पद पर नियुक्त किया गया है जबकि इससे पहले कांग्रेस कार्यकाल में ऐसा कभी नहीं हुआ है। इस बात का कांग्रेस के नेताओं को मलाल भी है।
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यह पांच सदस्य होंगे सरकारी
वित्त सचिव, संपदा अधिकारी, सीईओ, मुख्य वास्तुकार और प्रशासन के चीफ इंजीनियर को सीएचबी का सरकारी सदस्य नियुक्त किया गया है। इनकी नियुक्ति भी तीन साल के लिए हुई है।

वायलेशन को रेगुलर करने की सिफारिशों पर जल्द होगा निर्णय
इस समय शहर का सबसे बड़ा मुद्दा हाउसिंग बोर्ड के मकानों की वायलेशन को रेगुलर करना है। गठित कमेटी ने वायलेशन और जरूरत के अनुसार किए गए बदलावों को रेगुलर करने के लिए अपनी रिपोर्ट दे दी है लेकिन पिछले माह गवर्निंग बाडी का कार्यकाल समाप्त होने के कारण रिपोर्ट मीटिंग में नहीं आ पाई। ऐसे में अब इस कमेटी की सिफारिशें पास होने की उम्मीद है। प्रशासक की मंजूरी मिलने के बाद लोगों को राहत मिलनी शुरू हो जाएगी।
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