चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के फ्लैट्स ट्रांसफर के लिए पांच साल के लॉक इन पीरियड को खत्म करने के फैसले को प्रशासन ने नामंजूर कर दिया है। सीएचबी ने इस संबंध में फैसला लेने के बाद अनुमति के लिए प्रशासन को भेजा था।
इस पर प्रशासन ने यह कहते हुए इसे खारिज कर दिया कि इसका दुरुपयोग होगा और सीएचबी के मकान अलॉटमेंट से पहले ही ब्लैक में बिक जाएंगे। इससे पहले प्रशासन ने नगर निगम की ओर से हाउस टैक्स जमा कराने की अंतिम तिथि बढ़ाने संबंधी फैसले को भी नामंजूर कर दिया था।
सीएचबी में यह नियम है कि कोई भी अलॉटी अपना फ्लैट या मकान पॉजेशन लेने के पांच साल बाद ही बेच या ट्रांसफर कर सकता है। बोर्ड के अलॉटमेंट रूल के सेक्शन-16 में यह स्पष्ट था कि अलॉटी पांच साल से पहले न तो फ्लैट या मकान बेच सकेंगे और न ही उसे ट्रांसफर कर सकेंगे।
सीएचबी के मकानों में रहने वाले लोगों की मांग पर बोर्ड ऑफ डॉयरेक्टर्स ने हाल ही में यह फैसला लिया कि पांच साल के लॉक इन पीरियड को खत्म कर दिया जाए। साथ ही उन फ्लैटों और मकानों की ट्रांसफर या सेल की मंजूरी दे दी जाए, जो कि पांच साल पहले ही बिक गए हैं। इसके लिए सेक्शन-16 में संशोधन किया गया।
सीएचबी ने पहले भी लोगों को पांच साल के लाक इन पीरियड को खत्म करने की छूट दी थी। लेकिन, बाद में सीएचबी ने यह छूट वापस ले ली थी। ऐसे में सीएचबी फिर से यह छूट देना चाहता है।
जानकारी के मुताबिक सीएचबी की विभिन्न आवासीय योजनाओं के अलॉटियों ने अलॉटमेंट के साथ ही अपने फ्लैट जनरल पॉवर ऑफ अटार्नी (जीपीए) पर बेचे हुए हैं। कुछ योजनाओं में तो अभी तक फ्लैट की पोजेशन तक नहीं मिली है और उसे जीपीए पर बेच दिया गया है।
अब प्रशासन द्वारा सीएचबी के फैसले पर मुहर न लगाने से यह सभी लोग प्रभावित होंगे, जिन्होंने अपने फ्लैट अलॉटमेंट से पहले या उसके तुरंत बाद जीपीए पर बेचे हैं।