यूटी प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का शहर के सार्वजनिक और पर्यटन स्थलों पर कोरोना वायरस से बचाव के मानकों का पालन करवाने पर जोर है। जगह-जगह लोगों को जागरूक किया जा रहा है। मार्केट और शॉपिंग मॉल में सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क न पहनने पर प्रवेश नहीं मिल रहा। वहीं, कोरोना काल में अस्पतालों में कोरोना के सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
सोमवार को अमर उजाला की पड़ताल में जीएमसीएच-32 में बड़ी लापरवाही देखने को मिली। यहां सोशल डिस्टेंसिंग पर किसी का ध्यान नहीं है। इमरजेंसी में स्ट्रेचर मरीजों से भरे पड़े हैं। लोगों ने मास्क भी नहीं लगा रखे हैं। डॉक्टर खुले में मरीजों का इलाज कर रहे हैं। उधर, सुरक्षा मानकों की अस्पताल प्रशासन भी अनदेखी कर रहा है।
सीन-1: जीएमसीएच-32 की इमरजेंसी में लगभग 70 से 80 मरीज भर्ती किए गए हैं। मरीजों को स्ट्रेचर पर लेटा कर उनका इलाज किया जा रहा है। एक-एक मरीज के साथ दो से तीन तीमारदार भी हैं। इनमें एक-दो लोगों ने मास्क पहना। ज्यादातर लोग अपने मरीज के इलाज के लिए इधर-उधर चक्कर काटते दिखे। दूसरी ओर, गंभीर मरीजों ने भी मास्क नहीं पहन रखा है। बीच-बीच में डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ आकर इंजेक्शन और बोतलें लगा रहे हैं।
सीन-2: इमरजेंसी से हटकर फर्स्ट फ्लोर की गैलरी में मरीजों का तांता लगा दिखा। वहां पर भी स्ट्रेचर पर भर्ती मरीज दर्द और बीमारी से कराहते दिखे। यहां की स्थिति भी इमरजेंसी जैसे ही थी। इमरजेंसी सर्जरी और मेडिसिन के मरीजों से पूरी गैलरी भरी है। कोरोना से बचाव के मानकों के पालन की बात तो छोड़िए, यहां सामान्य संक्रमण से भी बचाव के मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। कोई न तो टोकने वाला न ही किसी के चेहरे पर कोरोना के संक्रमण का डर ही दिखा।
इमरजेंसी के साथ ओपीडी भी चल रही
जीएमसीएच-32 इमरजेंसी में कोरोना संक्रमण से बचाव के मानकों की अनदेखी की जा रही है। गंभीर मरीजों के साथ ओपीडी में आने वाले मरीजों को भी देखा जा रहा है। सर्जरी और मेडिसिन डिपार्टमेंट के डॉक्टर वहां बैठकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। अस्पताल के कर्मचारियों का कहना है कि कोरोना के मानकों की अनदेखी भारी पड़ सकती है। अस्पताल प्रशासन चाहे तो ओपीडी बी ब्लॉक में शिफ्ट कर सकता है, लेकिन इस तरफ ध्यान नहीं है।
मई के अंत में फिर शुरू हुई लापरवाही
लॉकडाउन के दौरान कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए अस्पताल की इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था बंद कर दी गई थी, लेकिन मई के अंत से फिर पुराना रवैया शुरू हो गया। इमरजेंसी से लेकर फर्स्ट फ्लोर की गैलरी तक मरीजों को स्ट्रेचर पर भर्ती कर इलाज किया जाने लगा।
यह कैसी व्यवस्था
कोरोना महामारी के बीच अस्पताल की लापरवाही भारी पड़ सकती है। अस्पताल प्रशासन को तत्काल सुधार करने की आवश्यकता है। इस तरफ तुरंत ध्यान दिया जाना चाहिए।
- प्रीति जैन, सेक्टर 34 चंडीगढ़
लोगों को बीमारियों के कारण और बचाव की जानकारी नहीं होती है। हॉस्पिटल में विशेषज्ञ की भरमार होती है, अगर वहां लापरवाही हुई तो कोरोना पर काबू पाना मुश्किल होगा।
- राजेंद्र गुप्ता, सेक्टर-15 चंडीगढ़
मरीजों के साथ अस्पताल के डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के सुरक्षा की पूरी व्यवस्था है। जहां तक इमरजेंसी में मानकों की अनदेखी की बात है तो अगर वहां ऐसी स्थिति है तो चेक करवाकर तत्काल सुधार कराया जाएगा।
- डॉ. रवि गुप्ता, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट