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बजट : चंडीगढ़ को 5836 करोड़ की आस, कल वित्त मंत्री करेंगी घोषणा

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चंडीगढ़। यूटी प्रशासन को वर्ष 2022-23 के लिए केंद्र सरकार से 5836 करोड़ रुपये की आस है। प्रशासन ने अगले वित्त वर्ष के लिए वर्तमान वित्त वर्ष से 650 करोड़ रुपये अधिक मांगे हैं, ताकि रुकी हुई परियोजनाओं को शुरू करने के साथ गांवों का विकास किया जा सके। अब चंडीगढ़ की झोली में कितना पैसा आएगा, यह मंगलवार को ही पता चलेगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट सत्र के दौरान इसकी घोषणा करेंगी।
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वित्त वर्ष 2021-22 के लिए चंडीगढ़ ने 5670 करोड़ रुपये मांगे थे। इसमें रेवेन्यू हेड के तहत पांच हजार करोड़ और कैपिटल हेड के तहत करीब 600 करोड़ रुपये मांगे गए थे, लेकिन 484 करोड़ की कटौती के बाद चंडीगढ़ को 5186 करोड़ रुपये ही मिले थे। इसमें नगर निगम में शामिल हुए गांवों के लिए कुछ खास नहीं था। ऐसे में निगम को उम्मीद थी कि संशोधित अनुमान (आरई) में उन्हें 203 करोड़ रुपये मिलेंगे। हालांकि केंद्र ने आरई में भी कुछ नहीं दिया, इसलिए अब वित्त वर्ष 2022-23 के लिए प्रशासन ने 5836 करोड़ रुपये की मांग की है। यह रकम वर्तमान वित्त वर्ष में मिले 5186 करोड़ से 650 करोड़ रुपये ज्यादा है। यह अतिरिक्त पैसा नगर निगम में शामिल हुए गांवों व प्रशासन की कुछ प्रमुख परियोजनाओं के लिए है। अब देखना यह होगा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण चंडीगढ़ को क्या देतीं हैं। बता दें कि वर्ष 2020-21 में कुल 5138 करोड़ रुपये मिले थे। इसमें रेवेन्यू हेड के तहत 4643 और कैपिटल हेड में 494 करोड़ रुपये मिले थे।
वर्तमान वित्त वर्ष के बजट का 85 फीसदी पैसा खर्च
यूटी प्रशासन की तरफ से संशोधित अनुमान (आरई) में 203 करोड़ रुपये जोड़कर वर्तमान बजट को 5389 करोड़ रुपये करने की मांग की गई थी, लेकिन केंद्र ने एक भी रुपया अतिरिक्त देने की बजाय 5186 करोड़ रुपये के सालाना बजट में से भी 244 करोड़ रुपये काट लिए। इसके साथ ही अब चंडीगढ़ का बजट 4942 करोड़ रुपये का रह गया है। प्रशासन ने अब तक पूरे बजट का 85 फीसदी पैसा खर्च कर दिया है। बजट का अधिकतम पैसा कर्मचारियों को तनख्वाह, भते, ग्रांट-इन-ऐड आदि में खर्च हुआ है।
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क्या है संशोधित अनुमान
किसी वित्त वर्ष के बीच या अंत में उस वर्ष की बची हुई अवधि में सरकार को कितना राजस्व प्राप्त होगा और उसका खर्च कितना होगा, इसके अनुमानित राशि को संशोधित अनुमान कहा जाता है। यह वित्त वर्ष के फर्स्ट हाफ यानी पहली छमाही के ट्रेंड के आधार पर तय किया जाता है। इसी वजह से बजट अनुमान में जो लक्ष्य तय किया जाता है, संशोधित अनुमान में उसमें अंतर आ जाता है।
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