रात में जीएमएसएच-16 ने जनक कुमार को दी छुट्टी
स्वास्थ्य सचिव शाम के समय जनक कुमार से मिलने जीएमएसएच-16 पहुंचे। जनक को जीएमएसएच-16 के सीसीयू वार्ड में भर्ती किया गया था। गर्ग वहां पीड़ित के परिजनों से भी मिले। परिवार के सदस्यों ने गर्ग का धन्यवाद किया। कहा कि उनकी वजह से जान बची है। डॉक्टरों की तरफ से बताया कि सभी तरह के टेस्ट सामान्य पाए गए हैं। जानकारी के अनुसार रात में जनक को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
गर्ग ने सीपीआर की नहीं ली है ट्रेनिंग
यशपाल गर्ग ने बताया कि उन्होंने सीपीआर की कोई ट्रेनिंग नहीं ली है। एक बार चैनल पर एक वीडियो देखा था। इसमें एक मरीज डॉक्टर के सामने बैठा था और डॉक्टर उसके लिए दवाई लिख रहे थे तभी अचानक मरीज कुर्सी पर से गिर गया। डॉक्टर ने उसे कुर्सी पर सीपीआर दी और मरीज की जान बच गई। लगभग चार महीने पहले महाराष्ट्र में यह घटना हुई थी। गर्ग ने कहा कि भले ही उन्होंने जो सीपीआर का तरीका अपनाया वह उचित नहीं था, मगर यही उस वक्त उनके दिमाग में बिना समय बर्बाद करे जो आया उन्होंने वही करना उचित समझा।
आज हाउसिंग बोर्ड के कर्मचारियों को दी जाएगी सीपीआर की ट्रेनिंग
गर्ग ने कहा कि उन्होंने चटाई मांगी थी लेकिन उसमें समय लग रहा था इसलिए कुर्सी पर बैठाकर ही जनक को सीपीआर दी। कहा कि सही प्रक्रिया के लिए आवश्यक है कि रोगी एक समतल सतह पर हो। इस घटना के बाद से पूरे हाउसिंग बोर्ड में हलचल है इसलिए बोर्ड के कर्मचारियों को गुरुवार को सीपीआर के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। उधर, दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने अपने ट्विटर हैंडल से इस पूरे मामले का वीडियो शेयर कर लिखा है कि हर इंसान को सीपीआर सीखना चाहिए।
क्या होता है सीपीआर
सीपीआर का फुल फॉर्म कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन है। यह इमरजेंसी मेडिकल तकनीक है, जिसके जरिए किसी व्यक्ति की सांस या दिल की धड़कन रुक जाने पर उसकी जान बचाई जा सकती है। जब अचानक हृदय गति रुक जाती है तो इस दौरान मस्तिष्क और फेफड़ों समेत बाकी हिस्सों का खून का दौरान बंद हो जाता है। ऐसे में सीपीआर एक प्राथमिक चिकित्सा का काम करता है। इसके जरिए मरीज की छाती पर दबाव बनाया जाता है, जिससे ब्लड फ्लो को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
जानिए कैसे देते हैं सीपीआर
पीजीआई ट्रामा सेंटर की प्रभारी डॉ. काजल जैन ने बताया कि अगर आपको सीपीआर की ठीक तकनीक पता है तो डॉक्टर तक पहुंचने से पहले आप उस मरीज की जान बचा सकते हैं। इसके लिए मरीज को सतह पर लेटाकर उसकी छाती के ठीक बीचोबीच दोनों हथेलियों से लगातार दबाव देना होता है ताकि हृदय में बंद हुए या धीमे रक्त संचार को पुन: सामान्य किया जा सके।