डेंगू से जंग से पहले ही इस बार सेहत विभाग के हाथ-पैर फूल गए हैं। इसके पीछे की वजह भी ऐसी है कि अफसरों को समझ नहीं आ रहा क्या करें। टाइगर मॉस्क्यूटो से जंग में विभाग का प्रमुख हथियार मच्छर मार दवा का स्प्रे और फॉगिंग है। उसी पर संकट खड़ा हो गया है। सूबे में एडीस एजिप्टी की ब्रीडिंग मिलनी शुरू हो गई है। बारिश शुरू होते ही डेंगू पंजाब में दस्तक दे सकता है। पर सेहत विभाग केपास अब तक फॉगिंग का इंतजाम नहीं है।
विभाग के पास मच्छर मार दवा सिप्नोथ्रिम का स्टॉक तो है, लेकिन जिस मिट्टी केतेल में मिला कर इसका छिड़काव किया जाता है, वह नहीं है। क्योंकि फूड सप्लाई विभाग ने इस बार केरोसिन ऑयल देने में असमर्थता जता दी है, जिसकेबाद सेहत अधिकारी मंथन में जुटे हैं। जानकारी के मुताबिक सेहत विभाग हर साल डेंगू सीजन से पहले जिला-वार मिट्टी के तेल की जरूरत का आकलन करता था। सीजन के दौरान फॉगिंग और स्प्रे केलिए मिट्टी के तेल के जितने भी स्टॉक की जरूरत होती है, वह फूड व सिविल सप्लाई विभाग को बता दिया जाता था,
जिसके बाद फूड सप्लाई विभाग उतना मिट्टी का तेल सेहत विभाग को मुहैया कराता था। सेहत विभाग कंट्रोल रेट केहिसाब से उसकी अदायगी कर देता था। पर इस बार फूड सप्लाई विभाग द्वारा असमर्थता जताने के बाद सेहत विभाग मुश्किल में फंसा है। वहीं, सूबे के करोड़ों लोगों की सेहत सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, सेहत विभाग के पास डीजल का विकल्प है। मच्छर मार दवा डीजल में मिला कर भी स्प्रे की जा सकती है। पर उसमें लागत कई गुना बढ़ जाएगी। सेहत अधिकारी लगातार इस मुद्दे पर फूड सप्लाई विभाग को लिख रहे हैं।
अभी तक मिट्टी का तेल नहीं मिला है। फूड सप्लाई विभाग ने भरोसा दिया है कि जिलों में जहां भी जितना स्टॉक उपलब्ध होगा, मुहैया कराया जाएगा। अभी सिर्फ लारवा की ब्रीडिंग मिल रही है, फॉगिंग की जरूरत डेंगू फैलने के बाद पड़ेगी।
- डॉ. गगनदीप सिंह, स्टेट नोडल अफसर (डेंगू), सेहत विभाग
विभाग ने केंद्र सरकार को रिक्वायरमेंट भेजी गई है, जैसे ही सप्लाई आएगी सेहत विभाग को मिट्टी का तेल मुहैया करवा दिया जाएगा।
- केएपी सिन्हा, प्रमुख सचिव, फूड सप्लाई विभाग