चंडीगढ़ में शुक्रवार को एक फोटो जमकर वायरल हो रही है। यह तस्वीर एक ऐसी बेटी की है जो ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ परीक्षा केंद्र में अपने पेपर लिख रही है। गंभीर बीमारी से जूझ रही 17 साल की कनिष्का 13 दिन आईसीयू में रहने के बावजूद शुक्रवार को बोर्ड परीक्षा का पेपर देने पहुंची।
कठिन परिस्थितियां अक्सर इंसान की असली ताकत को सामने लाती हैं। ऐसा ही उदाहरण 17 वर्षीय कनिष्का बिष्ट ने पेश किया, जिसने निमोनिया की बीमारी से जूझते हुए ऑक्सीजन सपोर्ट पर 12वीं कक्षा की परीक्षा देकर अदम्य साहस का परिचय दिया। कई दिनों तक आईसीयू में वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ने के बाद भी उसने हिम्मत नहीं हारी। 17 फरवरी को आईसीयू से बाहर आने के बाद बेटी ने एंबुलेंस में ऑक्सीजन सपोर्ट पर परीक्षा केंद्र पहुंचकर फिजिक्स का पेपर दिया।
विज्ञापन
चंडीगढ़ के सेक्टर-7 निवासी कनिष्का बचपन से दिव्यांग है। जनवरी 2026 में उसे गंभीर निमोनिया हो गया, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ती चली गई। डॉक्टरों को उसे आईसीयू में भर्ती करना पड़ा, जहां वह 13 दिनों तक रही। इनमें से 10 दिन वह बेहोशी की हालत में वेंटिलेटर पर रही। तीन दिन पहले ही डॉक्टरों ने उसका वेंटिलेटर हटाय, लेकिन वह अभी भी ऑक्सीजन सपोर्ट पर डॉक्टरों की निगरानी में है।
स्वास्थ्य की नाजुक स्थिति के बावजूद कनिष्का ने परीक्षा देने का दृढ़ निश्चय किया। सोमवार को उसे एंबुलेंस के माध्यम से मनीमाजरा मॉडर्न कॉम्प्लेक्स स्थित सरकारी मॉडल स्कूल के परीक्षा केंद्र लाया गया। स्ट्रेचर पर लेटी कनिष्का को डॉक्टरों की देखरेख में सावधानीपूर्वक परीक्षा कक्ष तक पहुंचाया गया। ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ उसने निर्धारित समय पर अपना फिजिक्स का पेपर दिया।
विज्ञापन
कनिष्का खालसा सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा है। स्कूल प्रबंधन तथा परीक्षा केंद्र की प्रिंसिपल मोनिका पुरी और शिक्षिकाओं ने उसकी हिम्मत की सराहना की। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने उसे एक घंटे का अतिरिक्त समय प्रदान किया। जहां अन्य छात्रों की परीक्षा दोपहर 1:30 बजे समाप्त हुई, वहीं कनिष्का ने ढाई बजे तक अपना पेपर पूरा किया।
कनिष्का के पिता प्रेम सिंह ने बताया कि डॉक्टरों ने उसे आराम करने की सलाह दी थी लेकिन बेटी ने साफ कहा कि यह उसके भविष्य का प्रश्न है और वह हर हाल में परीक्षा देगी। उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि बेटी की हालत देखकर चिंता होती है लेकिन उसकी हिम्मत पर गर्व भी है।